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Friday, 7 December 2018

क्या मोहब्बत इंसान को अँधा कर देती है ?

December 07, 2018 0 Comments
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Image Credit - Pixabay

आप में से कितने ऐसे लोग है जो ऊपर लिखी लाइन से सहमत है ! की मोहब्बत अंधी होती है या मोहब्बत इंसान को अँधा बना देती है ! इससे पहले की आप किसी भी नतीजे पे पहुँचे और अपना पक्ष चुन कर एक दूसरे का विरोध करने लगे उससे पहले मेरे विचारों को पढ़ लीजिये उस पर विचार कर लीजिये उसके बाद खुद का पक्ष चुनिए ! जब एक माँ अपने पुत्र की गलती होने के बावजूद उसे डाँट लगाने के बजाये उसका विरोध करने के बजाये वह उन लोगो में खोट और गलतियाँ निकालने और गिनाने लगती है ! जिन्होंने उसके पुत्र या पुत्री पर आरोप लगाया है या उसके पुत्र ने किसी के प्रति अपराध किया यह जानते हुए भी की मेरा पुत्र गलत है ! इसके बावजूद वह उसका पक्ष लेती है तो आप इसे क्या कहेंगे माँ की ममता या फिर अपनी ममता में अंधी हो चुकी एक माँ जिसे अपने बच्चो में कोई गलती ही नज़र नहीं आती ! जाहिर है इसे पुत्र मोह कहेंगे यानि अपनी ममता में एक माँ अंधी हो चुकी अब वह निष्पक्ष होकर फैसला नहीं दे सकती ! क़ुरआन में कहा गया है की अल्लाह सत्तर माओं से ज्यादा मोहब्बत करता है अपने बन्दों से इस बात से मेरे मन में प्रश्न उठना लाजमी था ! अगर एक माँ अपने बच्चो के खिलाफ कुछ बर्दास्त नहीं करती भले ही उसने कोई अपराध किया हो, इसके बावजूद वह उसका बचाओ करती है तो क्या मेरा रब मुझे नहीं बचाएगा जो मुझे सत्तर माओ से ज्यादा प्रेम करता है !
बहुत से लोग कहेंगे की क्यों नहीं जरूर बचाएगा ! और फिर यहीं प्रश्न उठ खड़ा होता है की अगर मैं किसी का गला काट दूँ तो क्या ईश्वकर मुझे दंड नहीं देगा ? इसका जवाब भी क़ुरान में ही है , बेशक इसमें कोई दो राय नहीं की अल्लाह हम से सत्तर माओं से ज्यादा मोहब्बत करता है ! किन्तु इसके बावजूद अगर आप किसी के प्रति कोई अपराध करते है किसी को ठेस पहुँचाते है तो आप दंड के भागिदार जरूर बनेंगे और उसकी सजा भी जरूर मिलेगी ! तो क्या इसका मतलब हम यह समझे की ईश्वर हमसे सत्तर माओ से अधिक प्रेम नहीं करता यह कहना गलत है की अल्लाह भगवन ईश्वर जिस किसी भी नाम से आप उसे जानते है वह आपको दंड देता है  सत्तर माओ से ज्यादा प्रेम नहीं करता ? मगर हमने यहाँ ईश्वर को बिच में लाया है तो फिर यह जानना भी जरुरी है की ईश्वर संतान मोह में नहीं पड़ता ! इसका मतलब यह हुआ की ईश्वर हमसे मोहब्बत तो करता है मगर वह हमारे मोह में नहीं पड़ता इसलिए वह इन सभी इंसानी भाव से मुक्त भी है और उसे इन सब का ज्ञान भी है ! ईश्वर के द्वारा अपनी रचना से किया गया यह प्रेम ही हमे मोहब्बत की झूठी भ्रम पैदा करने वाली अपराध और सच्ची  मोहब्बत में फर्क समझाती है !

आप अक्सर ऐसे लोगो को समाज में देख सकते है जिन्होंने मोहब्बत के नाम पर ऐसे ऐसे गुल खिलाये है की पूछो मत ! फिर चाहे वह लड़कियों के द्वारा न कहे जाने पर एक सनकी के द्वारा उस पर तेज़ाब फेकना हो या फिर मोहब्बत के नाम पर अपने ही पति के पीठ पीछे किसी और से सम्बन्ध बनाना हो ! हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया की एक स्त्री पुरुष की संपत्ति नहीं होती इसी लिए अब उसके द्वारा किया गया अडल्ट्री एक्टिविटी अपराध नहीं है ! यह फैसला ही अपने आप में पक्ष पात पूर्ण है क्योकि यह तो सही है की एक स्त्री पुरुष की संपत्ति नहीं है जो उस पर अधिकार जमाये किन्तु माननीय सुप्रीम कोर्ट इस आदेश को देते वक़्त यह भूल गए की जब एक पुरुष और स्त्री विवाह बंधन में बंधते है तो उसमे यह वचन भी शामिल होता है की वह दोनों हमेशा एक दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे और कभी जीवन में कोई ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो तो आपसी सहमति से विवाह सम्बन्ध का विच्छेद करेंगे ! लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट ने तो सीधा सीधा यह कह दिया तुम हमारे पीठ पर छुरा घोंपो सनम क्योकि अब हमारा तुम पर कोई अधिकार नहीं ! 

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसके विरोध में सिर्फ इस लिए हूँ क्योकि उन्होंने कहा है की महिला पुरुष की संपत्ति नहीं और मैं इस बात से सहमत हूँ मगर जब कोर्ट ने ये कहा की एक महिला अपनी मर्ज़ी से किसी और से सम्बन्ध बना सकती है तब में विरुद्ध में हूँ वो इस लिए ठीक है अगर महिला किसी और से सम्बन्ध बनाना चाहती है बनाये मगर पहले विवाह सम्बन्ध से मुक्त हो जाये क्योकि ऐसे में उसके द्वारा किया गया कोई भी कार्य लौट कर उसके पति तक आने ही है ! बेशक सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा की अगर पति चाहे तो ऐसे में वह महिला से तलाक ले सकता है ! क्या यह अजीब नहीं है की पहले आप ही मेरे दामन में दाग लगाए और फिर खुद ही अपराध मुक्त हो जाये ये कहा का न्याय है सुप्रीम कोर्ट को यह कहना चाहिए था की "एक महिला पुरुष की संपत्ति नहीं होती है ऐसे में एक महिला अपनी सहमति से किसी पुरुष या अन्य के साथ सम्बन्ध बनाना चाहती है तो वह इसके लिए मुक्त है अगर वह अविवाहित है तो अगर कोई महिला विवाहित है और वह फिर भी किसी अन्य व्यक्ति से सम्बन्ध बनाना चाहती है तो इसके लिए उसे पहले अपने विवाहित सम्बन्धो से त्याग करना होगा तलाक देना होगा ताकि पति का मान सम्मान भी बना रहे और महिला की अपनी स्वतंत्रता भी" तब यह बात हजम भी होती और न्याय पूर्ण भी ! अब मैं आपसे फिर से सवाल करता हूँ क्या मोहब्बत अंधी होती है या इंसान मोहब्बत में अँधा हो जाता है या इंसान का अपना स्वार्थ उसे अँधा बना देता है जिसे वह उचित ठहराने के लिए मोहब्बत अंधी होती है या मोहब्बत में इंसान अँधा हो जाता है जैसे दोगली दलीले देता है !

अगर मोहब्बत अंधी होती है अगर मोहब्बत में इंसान अँधा हो जाता है तो फिर अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म में कहा था की :- अगर मोहब्बत और जंग में सब जायज है तो फिर लड़कियों पर एसिड फैकने वाले लफुटों की हरकत भी जायज़ है ! और किसी लड़की के न कह देने पर उसका वस्त्र हरण करके उसका रेप कर देना भी जायज़ है क्योकि मोहब्बत अंधी होती है और मोहब्बत में इंसान अँधा होता है ! अब मैं फिर से आपसे वही सवाल पूछता हूँ बताइये मुझे क्या है आपका उत्तर ? आप लोगो का उत्तर चाहे जो भी हो मुझे उसकी परवाह नहीं मगर मेरा उत्तर पढ़ते जाइये जनाब 

"न तो मोहब्बत अंधी होती है और न गूंगी बहरी न तो इंसान मोहब्बत में अँधा होता है और न गूंगा बहरा इंसान के अंदर छुपा उसका स्वार्थ उसे अँधा बनाता है ! जिसे सच में किसी से मोहब्बत हो न वो स्वार्थ के लाख अन्धकार फ़ैलाने के बावजूद सच्ची मोहब्बत की रौशनी में रास्ता पा ही लेता है तो इसका अर्थ यह है, न तो पीठ पीछे विश्वास घात करना मोहब्बत है और न ही न कह देने पर तेज़ाब से किसी को जला देना मोहब्बत है और न ही किसी को किसी के लिए मार देने में मोहब्बत है ! मोहब्बत बस एक एहसास है उसे महसूस कीजिये उसे पाने की कोशिश करेंगे तो दूर हो जाएगी और अगर उसे महसूस करते हुए ज़िन्दगी जियेंगे तो करीब आएगी !"

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Md Danish Ansari

Thursday, 18 October 2018

आतंकवाद (वियतनाम युद्ध) 1955 - 1975 | Part 1

October 18, 2018 0 Comments
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Vietnam 1955
आतंकवाद की परिभाषा :- ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के द्वारा परिभाषित किया गया ऑक्सफ़ोर्ड के द्वारा परिभाषित आतंकवाद कुछ यूँ है- " राज्य या विरोधभाव को दबाने के लिए हिंसा या भयोत्पादक उपायों का अवलंबन"
सेकंड वर्ल्ड वॉर के ख़त्म होते ही दुनिया में दो मुल्को के बिच ताक़त और शक्ति विस्तार की होड़ शुरू हुई और आप जानते है की मैं किन दो मुल्को की बात कर रहा हूँ ! अमेरिका और रूस, सोवियत यूनियन के टूटने पर रूस की ताकत घट गयी और फिर अमेरिका की हुकूमत आयी पूरी दुनिया पर रूस लगा तार अपने पक्ष में देशों को एक जुट करता रहा वही दूसरी तरफ अमेरिका उसे तोड़ने और अपने साथ जोड़ने में लगा रहा !

विएतनाम युद्ध : 1 नवंबर 1955 को विएतनाम में युद्ध शुरू हुआ यह युद्ध शीतयुद्ध के दौर में लड़ा गया यह युद्ध दो अलग अलग विचार धरा को भी देखते हुए लड़ा गया अमेरिका पूँजीवाद का समर्थक है जबकि रूस और चीन मार्क्सवाद के ऐसे में उत्तरी वियतनाम को चीन और रूस का साथ मिला जबकि दूसरे खेमे दक्षिणी वियतनाम की और से अमेरिका और मित्र राष्ट्र लड़ रहे थे ! इस युद्ध की शुरुआत वियतनाम का फ्रांस के साथ आजादी के लिए लड़े गए नाकाम युद्ध से शुरू हुआ दूसरे विश्व युद्ध के बाद फ्रांस में इतनी ताकत नहीं थी की वह वियतनाम पर और ज्यादा देर तक के लिए अपना दबदबा बना कर रख सके ऐसे में विएतनाम दो भागो में बट गया उत्तरी विएतनाम सम्पूर्ण आजादी चाहता था साथ ही वह मार्क्सवादी था वही दूसरी और दक्षिणी वियतनाम था जो अमेरिका और मित्र राष्ट्रों की जी हुजूरी ही करता ! साथ ही दक्षिणी वियतनाम के शासक भ्रष्ट हो चुके थे उन पर कई गंभीर आरोप लग रहे थे ! वियतनाम कम्बोडिया चीन बर्मा और थाईलैंड से घिरा हुआ इन सब के बिच एक छोटा सा देश है लाओस उसने अपनी जमीन उत्तरी वियतनाम को दी उसके ऐसा करने पर अमेरिका इतना गुस्से में आया की उसने उस पर इतने बम गिराए जितना की उसने अफगानिस्तान और इराक युद्ध में भी नहीं गिराए ! जबकि लाओस खुद इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुआ था लाओस में 1964 से लेकर 1973 तक अम्रेरीकी वायु सेना ने हर 8 मिनट में एक बम गिराए गए है ! मीडिया रिपोर्ट और इतिहासकारों के अनुसार अमेरिका ने 260 मिलियन क्लस्टर बम विएतनाम पर गिराए है जोकि इराक युद्ध में गिराए गए कुल संख्या का 210 मिलियन ज्यादा है ! अमेरिकी सेना द्वारा वियतनाम के लोगो का कत्ले आम हुआ और यह सब कुछ न्यूज़ में साफ़ साफ़ दिखाया जा रहा था अमेरिकी सेना ने एक बड़े पैमाने पर वियतनामी लोगो को मार डाला जबकि वो निहथ्थे थे और मासूम थे मरने वालो में सिर्फ पुरुष ही नहीं थे इसमें बड़ी संख्या में औरते बच्चे बूढ़े और नौजवान थे इनमे सबसे ज्यादा लोग खेती करने वाले आम किसान थे ! अमेरिकी सेना ने लगातार रासायनिक हथियारों की बम बारी की जिससे लाखो एकड़ खेत तबाहो बर्बाद हो गए और जंगल के जंगल तबाह होते गए ! यह सब किस लिए था सिर्फ इस लिए न की उत्तरी वियतनाम ये चाहता था की दोनों एक हो के रहे जैसे वो पहले थे या फिर सिर्फ ये की वियतनाम मार्क्सवाद को सपोर्ट करता था इस लिए और आपको रास नहीं आया तो आप ने उस पर हमला कर दिया ! अमेरिका को लगा था की वियतनाम कमजोर है इसलिए वह जल्द ही घुटने टेक देगा और युद्ध समाप्त हो जायेगा पर ऐसा नहीं हुआ वियतनाम का पलड़ा भारी होता रहा और अमेरिकी सैनिक मुँह की खाये ! वियतनाम में अमेरिका के इतने सैनिक मरे गए की खुद अमेरिका में इस युद्ध को लेकर विरोध प्रदर्शन होने लगे की हम अपनी जान ऐसे युद्ध में क्यों खतरे में डाले जो युद्ध हमारा है ही नहीं !

यह बात सच भी है की यह युद्ध किसी भी नजरिये से अमेरिका के लिए थी ही नहीं तो फिर अमेरिका क्यों जबरदस्ती इस युद्ध में कूद पड़ा ! अमेरिका खुद को  महान दिखने के लिए हमेशा ये कहता रहा है की दूसरे विश्व युद्ध में वह नहीं उतरता अगर जापान ने पर्ल हार्बर पर हवाई हमला न किया होता ! तो यही पर हम यह पूछना चाहते है की फिर आप विएतनाम के युद्ध में क्या कर रहे थे आप के सैनिक वियतनाम की आम जनता को क्यों मार रही थी ! इसीलिए न की वो लोग अमेरिका की सोच और उसके विचारो से सहमत नहीं थे बस इसी लिए न अपनी ताकत और दबदबे का रौब दिखाने के लिए आप ने लाओस जैसे छोटे और कमजोर देश को पूरी तरह क्लस्टर बम में जला कर राख कर दिया किसके लिए जाहिर है सिर्फ और सिर्फ अपने अहंकार की भूख को मिटाने के लिए और आज पूरी दुनिया में खुद को आतंक विरोधी के रूप में दिखाते हो पर सच तो यही है की अमेरिकी अर्थववस्था और उसका विकास गरीब और पिछड़े लोगो के शोषण और उनके संसाधनों को लूट कर ही फलता फूलता रहा है !

अब मैं चाहता हूँ की आप सबसे ऊपर "आतंकवाद" की परिभाषा को फिर से पढ़े जिसे ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ने परिभाषित किया है ! ताकि आप यह समझ सके की दुनिया भर में कैसे आतंकवाद जन्म ले रहा है और कौन सी वो ताक़त है जो इसे बना रही है और इसे पनपने देने का पूरा मौका दे रही है ! वो भी सिर्फ और सिर्फ अपने राजनैतिक और आर्थिक भूख को मिटाने के लिए तुम गोली चलाओ तो सुरक्षा दूसरे गोली चलाये तो आतंकवाद !

राज्य या विरोधभाव को दबाने के लिए हिंसा या भयोत्पादक उपायों का अवलंबन" ही आतंकवाद है !
अर्थ : किसी राज्य या देश के लोगो के द्वारा विरोध को या उनके विरोधात्मक भाव को दबाने या कुचलने के लिए हिंसा या फिर उन्हें डराना धमकाना या ऐसे उतपात मचाना या फिर गलत प्रचार प्रसार करना जिससे समाज या व्यक्ति के मन में डर या भय फैले आतंकवाद कहलाता है ! 

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Md Danish Ansari

Thursday, 11 October 2018

बहुसंखयक समाज अल्पसंखयक समाज से क्यों डरता है

October 11, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh
गोंडवाना लैंड के विभाजन से पहले सभी देश एक ही महाद्वीप का हिस्सा थे जिसे गोंडवाना लैंड कहा जाता है ! धरती के भाहरी परत में टूट और उसके बिखराओ ने बहुत सारी सीमाओं का सीमांकन किया एक तरफ जहा उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका का निर्माण हुआ वही दूसरी तरफ यूरोप महाद्वीप का निर्माण हुआ वही अफ्रीका का और कुछ इसी तरह एशिया महाद्वीप का निर्माण हुआ ! भारत जोकि कभी अफ्रीका से लगा हुआ था वह टूट कर हिन्द महासागर से होता हुआ चीन से जा कर टकराया पृथ्वी के बाहरी परतो का आपस में यूँ मिलना और उनका एक दूसरे के अंदर सरकना इसकी वजह से हिमालय का निर्माण हुआ ! आपको जान कर यह हैरानी होगी की यह खिसकाओ आज भी जारी है और हर साल माउन्ट एवेरेस्ट की उचाई करीब आधा सेंटीमीटर बढ़ जाती है ! 

इसके बाद दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग महान सभ्यताओं का विकास हुआ जिसमे सबसे पुरानी सभ्यता थी मेसोपोटामिया उसके बाद मिश्र की सभ्यता फिर भारत की हड़प्पा और मोहन जोदरो की सभ्यता फिर चीन की सभ्यता और फिर अमेरिका की माया सभ्यता और इन सभ्यताओं में सबसे पहले जिन दो सभ्यताओं का मिलन हुआ वो थी मेसोपोटामिया और मिश्र की सभ्यता यह इस लिए भी संभव हुआ क्योकि दोनों सभ्यताओं की सरहद लगभग सटी हुई थी ! कई विद्वानों का तो यह भी कहना है की मेसोपोटामिया सभ्यता ही मिश्र की सभ्यता है पर इसमें बहुत विवाद है ! उसके बाद मिश्र से अरब का विकास हुआ और अरबो का आना जाना भारत में हुआ जिससे अब दुनिया की तीन सबसे बड़ी सभ्यताएं एक दूसरे के सम्पर्क में आ चुकी थी अरब भारत से ववपार करते थे ! जबकि दुनिया की दो और सभ्यताएँ हम उनसे और वो हमसे बिलकुल अछूते थे क्योकि एक तरफ हिमालय था तो दूसरी तरफ विशाल समुद्र शायद यही वजह रही की इन सभ्यताओं का आपस में मिलान नहीं हुआ बहुत लम्बे वक़्त के लिए !

दुनिया बदलती गयी उसके साथ ही सभ्यताएँ विकास करने लगी वहाँ भी जीवन पनपा जहा जीवन की कोई सम्भावना ही नहीं होनी थी ! समय और अंतरिक्ष ने मानव जाति को विकास करने और आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया और उसका हमने भरपूर उपयोग भी किया और इसी के साथ दुनिया भर के अलग अलग हिस्सों में राज व्यवस्था का उदय हुआ सब एक से बढ़ कर एक थी और सभी ने अपना शक्ति विस्तार किया दुनिया में शायद ही कोई ऐसी रजवावस्था होगी जिसने अपने शरहद और शक्ति का विस्तार न किया हो और इसी शक्ति और सिमा विस्तार में कई अलग अलग संस्कृति आपस में टकराई ! भौतिक विज्ञानं में हमे पढ़ाया जाता है की जब दो पार्टिकल्स आपस में टकराते है तो पहले विनाश होता है फिर उसी विनाश से निर्माण का काम शुरू होता है ! यही नियम दुनिया भर की सभ्यताओं का आपस में टकराना और उनका विध्वंश होना और उनके विध्वंश से फिर नयी संस्कृति और राजवावस्था का जन्म होना इसका प्रमाण है !

खैर वक़्त के साथ सब कुछ बदलता है हमारी पूरी दुनिया बदल गयी फिर आया हमारा युग जिसे हम आधुनिक युग कहते है ! इसी आधुनिक युग की शुरुआत में राष्ट्रवाद की शुरुआत हुई वैसे इस आधुनिक युग से पहले राष्ट्र की अवधारणा तो थी मगर वह उतनी मजबूत नहीं थी जब तक राष्ट्रवाद की अवधारणा सामने न आयी फिर उसके बाद दुनिया भर में राष्ट्रवाद के नाम पर बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यक समाज के साथ राष्ट्रवाद के नाम पर सिर्फ और सिर्फ बर्बरता ही दिखाई है ! यह बात मैं किसी एक देश के लिए नहीं कह रहा यह दुनिया भर के मुल्को पर फिट बैठता है फिर चाहे वो यूरोप में यहुदिओं का कत्लेआम हो या फिर अमेरिका में गोरे लोगो के द्वारा काले लोगो का शोषण ! आप दुनिया के हर एक मुल्क का इतिहास और उसका आज देख लीजिये कल भी बहुसंख्यक समाज एक झूठे डर का सहारा लेकर अल्पसंख्यक समाज को कुचलता रहा है और आज भी वही हो रहा है ! यह अल्पसंख्यक समाज सिर्फ धर्म के आधार पर नहीं है बल्कि कही रंग के आधार पर है तो कही नस्ल के आधार पर कही संस्कृति के आधार पर तो कही भाषा के आधार पर मेरे कहने का तात्पर्य यह है की बहुसंखयक समाज हमेशा अल्पसंखयक समाज का शोषण करता रहा है किसी एक वक़्त या जगह पर यह अपवाद हो सकता है !

मगर ज्यादातर यही देखा और पाया गया है एक ही जैसी सोच मान्यता संस्कृति सभ्यता और भाषा बोलने और उन्हें फॉलो करने वाले लोग हमेशा से अपने से अलग लोगो से डरते रहे है ! उनका ये डर जोकि बेबुनियाद है अक्सर आक्रामक हो जाता है फिर शुरू होता है कत्लेआम का वो दौर जिसमे इंसानी ज़िन्दगी का कोई महत्व नहीं रह जाता ! अब सवाल यह है की बहुसंख्यक समाज भला अल्पसंखयक समाज के लोगो से डरता क्यों है ? इसकी वजह साफ़ है हम इंसानो ने अपने अंदर ही एक तरह का सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है जिसे हम दिमाग की प्रोगरामिंग करना कह सकते है ! हम अपने दिमाग को इसी बात में यकीं दिलाते रहते है की जो हमारे जैसा दीखता है उनसे हमे कोई खतरा नहीं यहाँ दिखने का मतलब हर तरह के स्तर पर है जैसे धर्म जाती संस्कृति नाम रहन सहन पहनावा खाना पीना इत्यादि ! जहा उनके बिच कोई ऐसा व्यक्ति आ जाता है जिसका नाम अलग है पहनावा अलग है बोलने खाने पिने रहन सहन सब कुछ भिन्न है, वैसे ही बहुसंख्यक समाज सुरक्षा की मुद्रा में आ जाता है जबकि यह बात सच है की उसे किसी तरह का खतरा नहीं है ! इसके बावजूद वह हर कीमत पर सामने वाले को कुचल देना चाहता है वही अगर उन्ही के जैसा कोई व्यक्ति भले ही उन्हें ज़िन्दगी भर छलता रहे उनका शोषण करता रहे फिर भी वह उसमे विश्वास दिखाते है और यह कहने में कुछ गलत नहीं की यह आधुनिक समाज में लोगो की सबसे निचले स्तर की मूर्खता मात्र है !

नोट : आप मेरे विचारो से असहमत हो सकते है !

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Md Danish Ansari

Wednesday, 29 August 2018

नन्ही चिड़िया - Inspiration Story | Conclusion

August 29, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh - Inspiration Story
मैं थोड़ा उदास हो गया उसे वह न देख कर तभी अचानक से वो ची ची की आवाज करते हुए उसी पेड़ पर लोट आयी उसकी चोंच में कई तिनके थे ! शायद वह फिर से अपना घोसला बनाने वाली थी और देखते ही देखते उसने दिन भर तिनके इकठ्ठे करके अपना घोसला बनाना शुरू कर दी पर इस बार उसने अपना घोसला दूसरी डाल पे बनाई क्योकि पहली डाल तो टूट चूका था ! वो दिन भर काम करती रही मैंने घर वालो से कह कर उसके लिए अपनी खिड़की पर दाने रखवा दिए ताकि उसे कही दूर न जाना पड़े अपने खाने की तलाश में वो काम करती रही और मैं उसे देखता रहा ! वो बड़ी बारीकी से अपना काम कर रही थी एक एक तिनके को ऐसे एक दूसरे के साथ मिला रही थी जैसे एक चादर बुनने वाला धागों के क्रम को बड़ी सटीकता से करता है ठीक वैसे ही जैसे कपड़ो पे कढ़ाई की जाती है ! इससे पहले मैंने कभी इस पर धयान नहीं दिया कुछ देर बाद मेरी आँख कैसे लगी मुझे पता ही नहीं चला सुबह मुझे ची ची की आवाज़ सुनाई दी मैं जाग गया देखा वो चिड़िया मेरी खिड़की पे बैठी है !

मैंने उसके घोसले की तरफ देखा तो वह बन कर तैयार हो चूका था वो पहले वाले से बड़ा और ज्यादा मजबूत लग रहा था ! मैंने उस नन्ही चिड़िया से कहा - ओ तो तुम मुझे अपना घर दिखाना चाहती हो काफी खूबसूरत है तुम्हारा घर तुमने बहुत मेहनत की है इसके लिए है न ! वो बस खिड़की पे बैठी रही और ची ची की आवाज़ करती रही ऐसे जैसे वो मेरी बातो का जवाब दे रही हो शायद मेरा दिमाग ख़राब हो चूका है जो एक चिड़िया से बाते कर रहा हूँ और उससे उम्मीद कर रहा हूँ की वह मेरी बात को समझे और उसका जवाब दे ! तुम कितनी खुश किस्मत वाली हो तुम जहा चाहो वहा जा सकती मगर मैं नहीं हा कभी मैं भी दुनिया देखना चाहता था पर काम से फुर्सत ही नहीं थी आज फुर्सत है तो कही जाने के लायक ही नहीं ! खैर तुम्हे भूक लगी होगी तुमने कुछ खाया की नहीं, तभी दरवाजे पे दस्तक हुई अम्मी अंदर आयी तुम किस्से बाते कर रहे हो बीटा ? कुछ नहीं बस उस चिड़िया से देखिये उसने कितना खूबसूरत घोसला बनाया है अपने लिए, इसका पहला वाला घोसला बारिश और हवा के चलते बिखर गया था और वो डाल भी टूट गयी !

कुछ देर अम्मी मुझसे बाते करती रही फिर वो निचे चली गयी काम करने मेरी इस हालत को देख कर अम्मी उदास हो जाती है पर इसमें न तो मैं कुछ कर सकता था और न ही वो ! बारिश होने वाली है मैं उस नहीं चिड़िया के लिए थोड़ा परेशां भी हूँ पिछली बार उसका घोसला बिखर गया था इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए ये सोच कर बस उसके लिए दुआ कर दी ! उसका घोसला सही सलामत था मुझे यह देख कर काफी खुसी हुई कुछ दिन बीते और फिर एक रोज जब मैं सुबह उठा और खिड़की के बाहर जैसे ही देखा तो वह घोसला वहा नहीं था मैं थोड़ा परेशान हुआ मैंने जोर से अम्मी को आवाज लगाया और वो ऊपर, क्या हुआ तुम्हे ? अम्मी खिड़की से बाहर झाँक कर देखिये क्या उसका घोसला फिर से बिखर गया है ? तुम क्या कह रहे हो मैं कुछ समझी नहीं ? उस चिड़िया का घोसला देखिये की वो क्या बिखर गया है या निचे गिर गया है ! अम्मी निचे बाहर देख कर बोली माफ़ करना बेटा उसका घोसला टूट चूका है , मैं उदास हो गया !

कई दिनों तक वह मुझे दिखी नहीं मैं और परेशान होने लगा मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मेरा अपना मेरा साथ छोड़ गया हो मैं उसके बारे में बहुत ज्यादा सोच रहा था ! तभी एक शाम वो वापस आयी मेरी खिड़की पे उसके मुँह में फिर से कुछ तिनके थे ! मैं हैरान था - क्या तुम फिर से अपना घोसला बनाने वाली हो और वो भी उसी जगह देखो अगर तुम चाहो तो तुम यहाँ मेरे कमरे में रह सकती हो ! उसने अपने चोंच में दबे तिनके को खिड़की पे राखी और कुछ बोला उसने ची ची ची मैं समझ नहीं पाया की वो क्या कहना चाह रही है और वह फिर से उड़ कर उसी पेड़ पर जा बैठी और फिर शुरू हुई उसकी कारीगरी वह दिन रात मेहनत करती रही और देखते ही देखते फिर से घोसला तैयार हो गया ! मैं उसे देख कर हैरान था एक नन्ही सी जान जिसकी ज़िन्दगी शायद कुछ ही सालो की होगी वह इतना संघर्ष कर रही है सिर्फ अपने घर के लिए यह सब देख कर मैं हैरान था !

यह सब देख कर मुझे एक सिख मिली ज़िन्दगी चाहे छोटी हो या बड़ी उसे खुल कर जीना चाहिए और उस ज़िन्दगी में चाहे जितनी भी मुश्किलें आये उसका डट कर सामना करो आप हारोगे गिरोगे बार बार फ़िसलोगे मगर आपको रुकना नहीं है आपको बस वही करते जाना है ! जो आप करना चाहते है दुनिया क्या कहती है क्या करती है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता फर्क सिर्फ इस बात से आपको पड़ता है की आप क्या करना चाहते क्या पाना चाहते किससे प्यार करना चाहते है ये ज़िन्दगी आपकी है इसलिए आप यह तय करेंगे की आप अपनी ज़िन्दगी कैसे जीना चाहते है क्या आप बहादुरी के साथ ज़िन्दगी में आयी बड़ी से बड़ी तूफ़ान से सीधे टकरा जाना चाहते है या फिर उससे बचने के लिए भागना चाहते है आप बुजदिल बन कर जीना चाहते है या एक योद्धा की तरह वीर की तरह मरना चाहते है ! मैं इस बेड पर अपनी सारी ज़िन्दगी नहीं गुजारने वाला मैं बाहर जाऊंगा घूमूँगा जो मन में आएगा करूँगा प्यार करूँगा एक अच्छी ज़िन्दगी के लिए जो करना पड़े मैं करूँगा मैं हार नहीं मानुगा मैं हार नहीं मानुगा मैं हार नहीं मानुगा !

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Md Danish Ansari

Monday, 27 August 2018

नन्ही चिड़िया - Inspiration Story | Begining

August 27, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh - Nanhi Chidiya | Inspiration Story
घर के पास एक बिहि के पेड़ पर एक नन्ही सी चिड़िया का घोसला था ! वो अक्सर सुबह पहले उठती और देर शाम को वापस अपने बसेरे पर आ जाती इस घोसले को बनाये अभी उसे कुछ ही महीने हुए थे ! उसका घोसला मेरे बेड के पास से ही लेटे हुए अपने बाजु वाली खिड़की से देख सकता था ! छुट्टी वाले दिन कभी कभार मेरी नज़र उसके घोसले पर पड़ती तो वो कभी खाली होता तो कभी वो नन्ही सी चिड़िया उसमे उछल कूद कर रही होती तो कभी उसमे कुछ और तिनके बुन रही होती ! यह सब जब मैं देखता तो अजीब सा एहसास होता ऐसा सुकून महसूस होता जैसे कोई धीरे धीरे आपको ख़ुशी दे रहा हो और आपको उसमे मज़ा आ रहा है लेकिन आप उसे बता नहीं सकते और न ही किसी को समझा सकते है !

इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में जब थक हार कर अपने कमरे में वापस लौटता तो अपने बेड पे जाते ही नज़रे कभी कभी उसे ढूंढ़ने लगती ! गर्मी का मौसम आ गया जबरदस्त गर्मी पड़ रही थी ! एक दोस्त ने मुझे मैसेज किया  की गर्मी का वक़्त है थोड़ा सा अनाज और पानी परिंदो के लिए छत पर रखा करो क्योकि वो प्यासे और भूके मर जाते है ! मैंने हलके से झुक कर खिड़की के बाहर देखा तो वो चिड़िया वही थी ! उसकी चहचहाट बहुत खूबसूरत थी कभी कभी तो वो मेरे खिड़की के पास आ बैठती तो मैं उसे बस देखते रहता की आखिर ये करना क्या चाहती है ! वो इधर से उधर फुदकते रहती मुझे अच्छा लगता था मैंने उसके लिए अपनी खिड़की के पास अनाज और पानी रख छोड़ा था ! वो अक्सर आती दाना चुगति और हलकी सी आवाज़ पर भी फुर से उड़ जाती !

दिन यूँही गुजरते गए और बारिश का मौसम आ गया मुझे बारिश बहुत पसंद है और भीगना भी मैं जानता हूँ ज्यादातर लोगो को बारिश का मौसम पसंद नहीं पर मुझे पसंद है ! एक दिन मैं अपने दोस्त के घर से लौट रहा था रात काफी हो चुकी थी और जोरो की बारिश हो रही थी ! मैं फिर भी बाइक धीरे धीरे चलाता रहा ! भीग भी रहा था अचानक से हवा तेज़ हो गयी तो ढंड लगने लगी हाँथ भी कापने लगे ! मैं धीरे धीरे बढ़ता रहा तभी अचानक से टायर स्लीप हुआ मैंने गाड़ी को संभालना चाहा मगर गलती से एस्क्लेटर दे दिया और मेरी बाइक सीधे साइड में लगे लोहे डिवीडर से टकराया और मैं फैका गया ! मुझे पैरो में काफी चोट लगी थी खून बह रहा था पर मैं उठ नहीं पाया बहुत कोशिश करने के बाद भी नहीं फिर बेहोश हो गया ! सुबह आँख हॉस्पिटल में खुली फिर मेरे दोस्तों ने मुझे घर पहुँचाया डॉक्टरों का कहना था की रात भर मेरा खून बहता रहा जिससे मेरे शरीर में खून की कमी हो गयी साथ ही पैर की कुछ खास नशों को ज्यादा चोट लगी जिससे खून बहुत बहा और वह सिकुड़ कर एक दूसरे से चिपक सी गयी यही वजह थी की मुझे अपने सीधे पैर में जान महसूस नहीं हुई !
डॉक्टर तो यहाँ तक बोल गए की शायद ये पैर अब कभी काम न करे मैं इस बात को लेकर काफी परेशान रहता ! फिर एक दिन बिस्तर पर लेटे लेटे अचानक से मुझे उस नन्ही चिड़िया का ख्याल आया तो मैंने खिड़की से बाहर देखा तो उसका घोसला वहा नहीं था वो डाल शायद उसी तूफ़ान में टूट गया था जिस दिन मेरा एक्सीडेंट हुआ था !

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Tuesday, 26 June 2018

Gauhar Jaan | The Musician & Dancer

June 26, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh - Gauhar Jaan

Bharat ki pahli mahila recording super star Gauhar Jaan ke 145ve janmdin par google ne unhe sammanit karte huye yaad kiya hai tatha unka Doodle bana kar post kiya hai ! 26 june 1893 ko janmi bhartiya sinema ki mashhoor gayika ka asli naam Angelina yoward tha, wah bharat ki pahli gaayika thi jinhone apne gaaye gaano ki bakayda recording karwai thi  or yahi wajah hai ki unhe bharat ka pahla recording super star ka darja mila hua hai !

13 saal ki umr me rape

Bhartiya sangeet ko shikhar par pahuchane wali Gauhar Jaan asal zindagi me Shoshan ka shikaar hui thi ! 13 saal ki umr me unka balatkaar hua tha , is sadme se ubharte huye Gauhar jaan ne apna Sikka sangeet ki duniya me aajmaya or wah Kaamyaab bhi hui ! Asal me Gauhar Jaan ki kahani 1900 ke dasak me mahilaon ke shoshan dhokhadhadi or sangharsh ki kahani hai ! Gauhar jaan ki kahaani ko Vikram sanpath ne apne saalo ki research ke baad apni kitaab “My Name Is Gauhar Jaan” ke naam se sabke saamne laaye !

Gauhar Jaan ne 600 se jyada gaane record kiye

Gauhar jaan ne lagbhag 20 bhashaon me Thumri se lekar BHajan tak gaaye hai unhone lagbhag 600 Geet record kiye the , gauhar jaan south india ki pahli mahila gaayika thi jinke gaane sangeet Gramophone company ne record kiye the! 1902 se 1920 ke bich “The Gramophone Company of India “ ne Gauhar Jaan ke Hindustani , Bangla, Gujrati, Marathi, Tamil, Arbi, Farsi, Pashto, Angreji or French Geeton ke 600 Disk nikaale the, dekhte hi dekhte unka dabdaba itna buland ho gaya ki Riyasaton or Sangeet Sabhaon me unhe bulana pratishtha ki baat hua karti thi !

Gauhar Jaan ji ki Background Information

Birth Name  – Angelina Yeoward
Born            – 26 june 1873 Aazamgarh,
                      UttarPradesh, India
Died            – 17 jan 1930 Umr – 56 saal , India
Genres        –  Ghazal, Thumri, Dadra
Occupation  – Musician, Dancer

Years active – 1900 – 1930 

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Md Danish Ansari

Tuesday, 5 June 2018

शुक्रिया | Thanks

June 05, 2018 0 Comments

लगभग शाम हो ही चली थी सूरज क्षितिज पे था मौसम सुहाना था खुशनुमा था मैं अपने दुकान में बैठे बैठे लोगो को आते जाते देखता रहा सुबह से शाम हो गयी और अभी तक मैंने दिन की पहली बोहनी नही किया था बार बार मैं आज के दिन को लेकर दुखी हो जाता फिर आसमान पर जैसे ही नज़र पड़ती दिल खुश हो जाता बहुत ही खूबसूरत सुहाना मौसम था ! मैं जवान था इसलिए यह ख्याल आया काश इस सुहाने मौसम में हमसफ़र साथ होता तो ये शाम और भी खूबसूरत होती फिर कुछ देर बाद मैंने मन ही मन में ये कहा छोडो यार ये इश्क़ फरमाने की बातें जब ज़ेब और पेट खाली हो तो ये इश्क़ और मोहब्बत ही साँप और बिच्छू बन कर डसने लगते है ! उसके बाद मैंने आँख बंद करके खुदा से दुआ करने लगा ए मेरे मालिक ए सारे कायनात को बनाने वाले इसके कर्ता धर्ता क्या तेरे इस गुनहगार बन्दे को आज क्या खाली हाँथ ही लौटा देगा क्या तू मुझसे इतना ख़फ़ा है की तू अपने बेसुमार खजाने से मुझे एक बून्द भी अता नही कर सकता मेरे गुनाहों को माफ़ कर मेरे मालिक और अपने इस गुनहगार बन्दे को अपने खजाने से कुछ हलाल-ए-रिज़्क़ अता कर दे ! इतनी सी दुआ करके मैंने अपनी आँख खोला तो देखा सामने एक खातून खड़ी है मेरे तरफ पीठ करके दूकान में कुछ देख रही है, मैं फ़ौरन कह उठा आपको कुछ चाहिए और वो पलटी मैं बस वही चित हो गया उसने सामान जो ख़रीदा सो ख़रीदा मैंने उस खातून के बेग में उसके ख़रीदे सामान के साथ अपना दिल भी पैक कर दिया और मुझे खबर भी न हुई आज वो खातून मेरी ज़िन्दगी और मौत दोनों जहाँ में हमसफ़र है और हम आज मिट्टी के छः फुट गड्ढे में दफ़्न है ! शुक्रिया ज़ुलेखा मेरा साथ निभाने के लिए शुक्रिया युसूफ मुझे अपने सफर का हमसफ़र बनाने के लिए शुक्रिया मेरे मौला हमे ये खूबसूरत ज़िन्दगी देने के लिए और शुक्रिया मौत से मिलाने के लिए मौत के बगैर ज़िन्दगी अधूरी है जैसे मैं और तुम !

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Md Danish Ansari

Tuesday, 29 May 2018

दरख़्त | Darakht

May 29, 2018 0 Comments

कई हज़ारो साल पहले इस ज़मीन पर एक बाहरी दुनिया से एक बीज आया और इसकी सतह से टकरा गया बारिश हुई और वह अंकुरित होने लगा और फिर धीरे से एक पौधा बना धीरे धीरे हवा पानी मिटटी और रौशनी ने इसे सिचा और वह धीरे धीरे बढ़ता हुआ आखिर एक विशाल दरख़्त में बदल गया! इस दरख़्त का फल बाकि आस पास मौजूद दरख्तों से ज्यादा मीठा और रसदार था इसके एक फल से ही आपका पेट तो भर जाता मगर आपका मन नहीं भरता धीरे धीरे इसकी शाखाये बढ़ती गयी इसके बीज दूर दूर तक फैलते गए और देखते ही देखते पूरा एक जंगल तैयार हो गया हरा भरा और खूबसूरत जंगल दूर दूर से जानवर परिंदे सब यहाँ आ कर रहने लगे जिससे इस जंगल की खूबसूरती और बढ़ गयी यहाँ हर तरह के जानवर थे चाहे वो शाकाहारी हो या मांसाहारी ! सभी जानवर मिल जुल कर रहते थे सभी अपनी प्रकृति के अनुसार ही व्यवहार करते थे ! मांसाहारी जानवर शाकाहारियों को खाते और शाकाहारी जानवर पेड़ पौधो को खाते और इस तरह पूरी एक खाद्य श्रृंखला निर्मित हो गयी फिर उन्ही में से कुछ ऐसी प्रजातियां भी पनपी जो इन दोनों को खाती थी और इस तरह से यह जंगल फलने पलने लगा फिर अचानक से कुछ जानवरो ने अपनी प्रकृति के अनुसार व्यवहार करना बंद कर दिया उसने बाकि जानवरो पर अपना दबाव बनाना शुरू कर दिया और धीरे धीरे पुरे जंगल में इसी तरह के व्यवहार सभी में आने लगा और जंगल के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग जानवरो और परिंदो ने कब्ज़ा कर लिया फिर उन जानवरो में आपसी संघर्ष हुआ क्योकि पुरे जंगल में हर चीज हर जगह नहीं थी और अपनी जरूरतों के लिए वो एक दूसरे पे हमला करने लगे इसी तरह सब चलता रहा साल बीते और सदियाँ बीती मगर खाना बदोशी जंगो का सिलसिला नहीं रुका कुछ परिंदो ने समझदारी दिखाई और शांति बहाल करने की नियत से उनमे आपसी समझौते करवाए मगर इसके बावजूद बेवजह क़त्ल होते रहे और पुरे जंगल की जमीन पर लहू की मोटी परत जम गयी यह परत साल दर साल बनती रही और फिर बारिश का पानी जंगल में न ठहर सका और दरख़्त मरने लगे जंगल के उस सबसे पुराने पेड़ ने आसमान से मदद मांगी मगर आसमान के बेतहासा बारिशों के बाद लहू की वो मोटी परत तो जरूर ढीली हो गयी मगर इसका असर और भयानक हो गया लहू में मौजूद नमक पानी में घुल कर मिटटी को खारा बना दिया अब और देखते ही देखते जंगल मरने लगा और अपने ही अंदर सिमटने लगा मिटटी अब उपजाऊ नहीं रही और देखते ही देखते सारा जंगल तबाह हो गया और वो सभी जानवर और परिंदे भी तबाह हो गए जो सालो से आपस में लड़ रहे थे और वो दरख़्त भी धीरे धीरे मर गया उसकी ये हालत देख आसमान खूब रोया इतना रोया की ज़मीन की घिसावट शुरू हुई और पानी ने उसे बहा कर उसे अथाह गहराई के खाई में इकठ्ठा होने लगा और देखते ही देखते खारे पानी का विशाल दरिया बन गया और जमीन पहले की तरह उपजाऊ हो गयी खाना बदोशी जंग और संघर्षो के बिच कुछ बीज जमीं में दबे हुए थे और फिर वो अंकुरित हुई और एक पौधे की शक्ल लेने लगा आसमान ज़मीन हवा और रौशनी ने उसे सहारा दिया और वह धीरे धीरे बड़ा होते हुए एक विशाल दरख़्त में तब्दील हो गया और फिर से जमीन हरी भरी और बेसुमार खूबसूरती में तब्दील हो गयी ! 

सिख : इस पूरी कहानी में इंसान वो जानवर है जिसने जंग शुरू की और खुद की तबाही का ज़िम्मेदार बना हम वो जानवर है जो धर्म , जाति , सम्प्रदाय , संस्कृति , राजनैतिक , आर्थिक , सामाजिक , खान , पान , वेश , भूषा , बोली , भाषा , रहन , सहन , वैचारिक और न जाने किन किन वजहों की वजह से एक दूसरे से जंग लड़ रहे है और वो खूबसूरत दरख़्त यानि हमारी ज़मीन अब धीरे धीरे मर रही है आसमान चाहे जितना बरसे वह पानी अब इसपर ठहरता नहीं है और जा मिलता है तेज़ी से अथाह गहराई वाले खारे समंदर में !


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Md Danish Ansari

Sunday, 27 May 2018

|| शैतान का मुँह ||

May 27, 2018 0 Comments

आज सुबह जब उठा तो हर रोज़ की तरह सब कुछ ठीक ही था कुछ वक़्त हुआ ही था मुझे उठे हुए की अम्मा और मझले भाई में बहस शुरू हो गयी अम्मा को मझले भाई की हरकते पसंद नहीं वो घर का कोई भी काम नहीं करता उसके लिए ये घर एक होटल की तरह है और खून के रिश्ते उसके सेवक है और वो कस्टमर, बैड से उठा आँगन की तरफ गया तो बड़ा भाई न जाने सुबह सुबह किससे बहस में लगा हुआ था घंटो गुजर गए और वह मोबाइल में सामने वाले से किसी बात पर बहस करता रहा यहाँ लोग सुबह उठते ही अपने काम के लिए दौड़ लगाते है और यहाँ सब लोग बहस में लगे हुए थे मन किया सबको चिल्ला कर बोलूँ बस करो बहुत हो गया फिर सोचा अगर मैंने अपनी जबान खोली तो फिर मैं भी इसी बहस का हिस्सा हो जाऊंगा बाथरूम में नहाते नहाते ये ख्याल आया, लगता है आज सब शैतान का मुँह देख कर उठे है कब से एक दूसरे के खिलाफ मुँह बाए हुए है और एक दूसरे को समझने की कोशिश भी नहीं कर रहे बस आग उगल रहे है शैतान के मुँह में जहन्नम की आग की तरह लपट रहे है ये सोचते हुए मैं चुप चाप खुदा का नाम ले कर अपने काम पर चला गया !

सीख : अपनी ज़बान पर काबू रखो जब बहस की स्थिति बने तो अपनी जबान पे ताले जड़ दो जहन्नम में सबसे ज्यादा बदजुबानी लोग होंगे !

Md Danish Ansari

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Saturday, 14 April 2018

सत्य मेव जयते

April 14, 2018 0 Comments
Pic Source : City JK FM

हमारे देश में तीन सेनाये पहले से है जो हम सबकी हिफाजत करती है बड़ी ही मुस्तैदी से 24 * 7 घंटे ये सेना है - थल सेना , जल सेना और वायु सेना। इन तीन सेनाओं के अलावा इस देश में और भी बहुत सारी सेनाये जन्म ले रही है कुछ धर्म का नाम लेकर कुछ जाति का नाम लेकर कुछ सम्प्रदाय का नाम लेकर कुछ संस्कृति का नाम लेकर इन सेनाओं के नाम कुछ इस तरह है फलाना सेना , ढिमका सेना , ताऊ सेना , मौसी रक्षा सेना , चाचा धर्म सेना , खाला की रक्षा सेना वगेरा वगेरा वगेरा। 
ये सेनाये असल में सेनाये कम और गुंडे मवालियों की भीड़ ज्यादा है ये गुंडे और मवालियों की भीड़ किसी के साथ इन्साफ नहीं करती ! एक लड़की स्कूल से घर वापस जाती है और रस्ते में कुछ मजदुर उसे रोक के कहते है की उनके पास उसके आपत्ति जनक फोटोज है अगर वह उनकी बात नहीं मानती है तो वह उसे सोशल मीडिया पर डाल देंगे।  लड़की ने इस बात की शिकायत अपने घर वालो के साथ मिलकर पुलिस स्टेशन में कर आये उसके कुछ देर बाद व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी से झूट का ज्ञान की गंगा बहनी शुरू होती है और गुंडे मवालियों की एक फ़ौज बाहर निकल कर चुन चुन कर दुकानों को आग लगा देती है वे सभी दुकाने मुस्लिमो की थी बाद में उस भीड़ के चले जाने के बाद पड़ोसी दूकानदार जलती हुई दुकानों की आग को बुझाते है और वे सब हिन्दू थे अब यहाँ सवाल ये है की जिन लोगो ने आग लगाया वो कौन थे जिनकी दुकाने जली वो मुस्लिम और जिन्होंने आग बुझाया वो हिन्दू तो आग लगाने वाले हाँथ कौन से थे मैं इन्हे स्वंघोषित हिन्दू कहता ठीक उसी तरह से जैसे मैं उन आतंकवादियों को स्वंघोषित मुस्लिम कहता जो सर पे टोपी लगा कर दाढ़ी बढ़ा कर मासूमों की हत्या कर देते है। 

अब आते है उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में एक विधायक और उसका भाई मिलकर एक लड़की का रेप करते है मैं आपको ये नहीं बताऊंगा की विधायक किस पार्टी से है या उसका नाम क्या है लेकिन मैं आपको यह जरूर बताऊंगा की रेप करने वाले खुद को किस धर्म का मानते है और जिस लड़की का रेप हुआ वो किस धर्म से आती है और वो भीड़ जिसने उस लड़की के ऊपर हमला किया उस रेपिस्ट नेता और उसके भाई को बचाने के लिए रेप हो गया लड़की और उसके पिता पुलिस स्टेशन गए इस उम्मीद में की रिपोर्ट करेंगे पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं करती उल्टा रेपिस्ट नेता का रेपिस्ट भाई पीड़िता के बाप को उठा ले जाता है उसे बुरी तरह मार कर अधमरा छोड़ देता है थोड़ी देर बाद पुलिस आती है और उस लड़की के पिता को उठा कर जेल में दाल देती है जहा पिता की मौत हो जाती है पुलिस मरे हुए पिता के अंगूठे का निशान लेते है बहुत सारे दस्तावेजों पर फिर उस नेता के के समर्थक उस लड़की पर हमला कर देते है जैसे तैसे वह लड़की अपनी जान बचा कर वहा से भाग जाती है अब सबसे छुपते छुपाते फिर रही है न जाने कब फिर कोई उसकी लाचारी का फायदा उठा ले। 
इस पुरे घटना क्रम में नेता भी हिन्दू लड़की भी हिन्दू लड़की का बाप भी हिन्दू मरने वाला भी हिन्दू मारने वाला भी हिन्दू रेप करने वाला भी हिन्दू जिसका रेप हुआ वो भी हिन्दू और फिर उस नेता के लिए एक और सेना भीड़ बनकर सामने  जाती है। 

अब चलते है जम्मू कश्मीर आठ साल की आसिफा को उसका पड़ोसी उसे गिडनॅपे करता है उसे मंदिर में कैद करता है उस छोटी सी बच्ची को हाई डोज़ बेहोशी की दवा देकर मंदिर में कैद करता है उसका सामूहिक बलात्कार करने से पहले मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है फिर उस बच्ची के जिस्म से सब मिलकर एक एक करके गोस्त का टुकड़ा नोचने लगते है सब मिलकर उसका बलात्कार करते है उस लड़की को पत्थरों से कुचल देने के बाद उनमे से कुछ उस बच्ची के मर जाने के बाद भी उसका बलात्कार करते है। लड़की का पिता अपने बच्ची के लाश को उसके क्षत विक्षत शरीर को अपने हाँथों में उठाये हुए है पुलिस आती है ताकि रिपोर्ट दर्ज हो सके और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही हो सके मगर होता क्या फिर से एक गुंडे मवालियों की फलाना धर्म सेना आती है और पुलिस से धक्का मुक्की करती है जय श्री राम का नारा लगाती है हाँथों में झंडे लिए भारत माता की जय बोलती है और लड़की के पिता को देशद्रोही और पाकिस्तानी बोल कर उसके साथ धक्का मुक्की करते है पुलिस बिना रिपोर्ट दर्ज किये लौट जाती है दो नेता है आते है और उस फलाना धर्म सेना की वाह वाही करते है और उनका मनोबल बढ़ा कर चले जाते है।  अब आप मुझे बताइये इनमे कौन सही है और कौन गलत हिंदुस्तान में दो तरह के राम का वास है इस वक़्त एक वो राम जो हम सबके दिलों में वास करता है वो राम हिंदुस्तान के कोने कोने में वास करता है और एक राम ऐसा है जो इनके जबानो पर तो है पर इनके दिलों में नहीं है हम सबका राम अन्याय करने से रोकता है और इन गुंडे मवालियों का राम अन्याय करने के लिए कहता है और जुल्म करने वालो को बचाने के लिए प्रेरित करता है ठीक इसी तरह दुनिया में सभी धर्मो का प्रति रूप जन्म ले रहा है एक वो इस्लाम है जो कहता है किसी एक मासूम का खून करना पूरी इंसानियत का खून करने के बराबर है और एक झूठा और फरेबी लोगो का इस्लाम है जो इस्लाम के नाम पर जिहाद के नाम पर मासूम लोगो का क़त्ल कर देते है इसी तरह बौद्ध धर्म भी दो है एक वो है जो कहता है की किसी जिव की हत्या मत करो और एक वो है जो कहता है की मुसलमानो को मार डालो आज पूरी दुनियां में हर धर्म का एक बुरा पक्ष तैयार हो रहा है इसे तैयार करने वाले हम ही लोग है न की कोई और तो फिर बताइये मुझे क्या मेरा यह कहना उचित नहीं की राम का नाम जपने वाला राम भक्त नहीं होता ठीक उसी तरह कलमा पढ़ने वाला हर शख्स मुस्लमान नहीं होता भारत माता की जय कहने वाला हर शख्स देश भक्त नहीं हो सकता ठीक उसी तरह वन्दे मातरम न कहने वाला देश का गद्दार नहीं हो सकता।

मैं हमेशा एक बात कहता राष्ट्रवाद किसी भी मुल्क को बेहतर बनाने की क्षमता रखता है वही अंधराष्ट्रवाद किसी भी ताक़तवर मुल्क को धरासाई करने की क्षमता रखता है ठीक इसी तरह सच्चा धर्म हमे बुराई और झूट के मार्ग से बचाता है वही अन्धविश्वास हमे अज्ञानता के गर्त में धकेल देता है जहा सिर्फ अँधेरा है जहा कुछ भी नहीं आता ये जो गुंडे और मवालियों की टोली है न ये भी धर्म से कोसो दूर है और अधर्म के गर्त में जा पहुंचे है जहा उन्हें न तो सत्य दीखता है न सुनाई देता है बस रह जाता है तो उनके अंदर का अन्धविश्वास। 

नोट :- इस लेख का मकसद किसी भी सच्चे आस्थावादी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचना नहीं है इसका मकसद सिर्फ एक है की लोगो को सत्य दिखाया जाये ताकि वह झूठे और मक्कार लोगो के जाल में ना फंसे धर्म के नाम पर क्योकि वो धर्म नहीं अधर्म है वहा सत्य की प्राप्ति नहीं असत्य की गंगा का वास होता है ऐसे पाखंडी लोगो से बच कर रहे और अपने लोगो को भी इन लोगो से दूर ही रहने की सलाह से दे व्हाट्सप्प पे बांटे गए कचरे को सत्य मान कर ग्रहण करने और उसे दुसरो तक पहुंचने से पहले उसका सोर्स पता करे यह भी पता करे की इसके तथ्य सही है या नहीं। 

Sunday, 18 March 2018

हिन्दू नव वर्ष | Hindu New Year

March 18, 2018 0 Comments

ग्रंथो में लिखा है की जिस दिन  सृस्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया उस दिन चैत्र शुदी 1 रविवार था ! हम सभी के लिए आज का ये संवत्सर 2075 बहुत ही महत्वपूर्ण है ऐतिहासिक रूप से और हमारे हिन्दू भाई बहनो के लिए यह धार्मिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योकि इस वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रविवार है शुदी और "शुक्ल पक्ष एक है !
चैत्र के महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तारीख को सृस्टि का आरम्भ हुआ था।  हिन्दू नव वर्ष चैत्र प्रतिप्रदा को शुरू होता है इस दिन ग्रहो और नक्षत्रों में दिशा परिवर्तन होता है हिंदी महीने की शुरुआत इसी दिन से होती है !

इसी समय सभी पेड़ पौधों में फूल मंजर कली आते है वातावरण में एक नया जोश होता है जो मन को मोह लेता है ! जीवो में धर्म के प्रति आस्था बढ़ जाती है और इसी दिन ब्रम्हा जी ने सृस्टि का निर्माण किया था भगवान विष्णु का प्रथम अवतार इसी दिन हुआ था साथ ही साथ नव रात्र की शुरुआत इसी दिन से होती है जहा हिन्दू भाई बहन उपवास रखते है !

वैष्णव दर्शन भी चैत्र मास भगवान नारायण का ही रूप है चैत्र का आध्यात्मिक स्वरुप इतना उन्नत है की इसने बैकुंठ में बसने वाले ईश्वर को भी धरती पर उतार दिया। न शीत न ग्रीष्म पूरा पावन काल है श्री राम का अवतार चैत्र शुक्ल नवमी को होता है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के ठीक नवे दिन भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।  आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन हुई थी यह दिन कल्प सृस्टि युगादि का प्रारंभिक दिन है।  संसार व्यापी निर्मलता और कोमलता के बिच प्रकट होता है हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत्सर विक्रम संवत का सम्बन्ध सिर्फ हमारे काल चक्र यानि समय से ही नहीं बल्कि साहित्य और जीवन जीने की विविधता से भी है। 
चैत्र मास का वैदिक नाम है मधु मास मधु मास मतलब आनंद बाटती वसंत का मास। यह वंसत आ तो जाता है फाल्गुन में मगर पूरी तरह व्यक्त होता है चैत्र में पूरी प्रकृति खिलखिला उठती है फल पकने लगते है चारो और पकी फसल का दर्शन आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है खेतो में हलचल फसलों की कटाई हंसिए का खर खर करता स्वर खेतो में डांट डपट मजाक करती आवाजे जरा अपने देखने के नज़रिये को विस्तार दीजिये चैत्र क्या आया मानो खेतो में हंसी ख़ुशी की रौनक  गयी। 
नई फसल का घर में आने का समय भी यही है इस समय प्रकृति में सभी जिव जंतुओं पेड़ पौधों में नया जीवन रचने बसने लगता है।  गौर और गणेश पूजा भी इसी दिन से तीन दिन तक राजस्थान में की जाती है ! चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है वह वर्ष संवत्सर का राजा कहा जाता है , मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है वही संवत्सर मंत्री होता है , मेषार्क का मतलब क्या है असल में यह मेष राशि से बना है इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है इसी लिए इसे मेषार्क कहा जाता है संधि विच्छेद कुछ इस तरह है मेष + अर्क = मेषार्क। 

नव वर्ष एक उत्सव की तरह पुरे विश्व में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग तरीको तथा विधियों से मनाया जाता है ! विभिन्न सम्रदायों के नव वर्ष समारोह अलग अलग होते है और इनके महत्व भी विभिन्न संस्कृतियों में अलग है अलग होती है जैसे -

इस्लामी कैलेंडर का नया साल मुहर्रम से शुरू होता है इस्लामी कैलेंडर पूरी तरह चाँद पर आधारित है जिसके कारण इसके बारह मासो का चक्र 33 वर्षो में सौर कैलेंडर का एक चक्र पूरा करता है। 

हिब्रू नव वर्ष - हिब्रू मान्यताओं के अनुसार ईश्वर द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे इस सात दिन के संधान के बाद नया साल मनाया जाता है। 

पश्चिमी नव वर्ष - नया साल 4000 साल पहले से बेबीलोन में मनाया जाता रहा लेकिन उस समय नए साल का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था ! रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने इसा पूर्व 45 वे वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की उस समय विश्व में पहली बार १ जनवरी को नया साल मनाया गया।  


नोट :- अगर लिखने मैं या किसी तरह की जानकारी साझा करने में कोई गलती हुई हो तो उसके लिए क्षमा का प्रार्थी हूँ। 
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Md Danish Ansari

Wednesday, 14 March 2018

हमसफ़र | Humsafar Part-8

March 14, 2018 0 Comments

हम पुलिस स्टेशन पहुँचे और वहा काफी देर तक मुझ से पूछ ताक्ष किया गया उन्होंने मेरा पूरा बयान रिकॉर्ड किया फिर हम वहाँ से निकल कर वापस शबनम के घर गए कुछ वक़्त वहा रुकने के बाद मैं जाने लगा तो शबनम की अम्मी ने रोका ! तुम जाओगे कैसे ? जी ऑटो से , रुको मैं ड्राइवर से कह देती हूँ वो तुम्हे छोड़ आएगा ! जी सुक्रिया पर मैं चले जाऊँगा , नहीं बेटा तुम हमारे लिए इतने दूर से यहाँ तक आये हमारी बच्ची की मदद कर रहे हो हम तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकते ! जी ये तो बस मेरा फ़र्ज़ था मेरी जगह कोई और होता तो वह भी वही करता जो मैं कर रहा हूँ , शायद ? खैर मैं तुम्हारी एक नहीं सुनने वाली मैं गफ्फूर से कह देती हूँ वो तुम्हे छोड़ देगा ! ठीक है जैसा आप बेहतर समझे , मैं बाहर निकलने लगा तो फिर से उसकी अम्मी ने रोका अच्छा बेटा रात का खाना तुम हम लोगो के साथ ही खाना मैं गफ्फूर को भेज दूंगी वो तुम्हे लाने के लिए चला जायेगा ! जी इसकी क्या जरुरत थी खामखा आप जहमत उठा रही है मैं होटल में खा लूंगा , अरे बेटा जहमत कैसी तुम जब तक यहाँ हो हमारे मेहमान हो और महमानो का ख्याल रखना तो फ़र्ज़ है हमारा ! जी ठीक है आप जैसा बेहतर समझे चलता हूँ अस्सलाम वालेकुम - वालेकुम अस्सलाम !

मैं कार में बैठ गया गाड़ी चलने लगी और मैंने खिड़की से ऊपर की तरफ देखा तो दोनों ऊपर खड़ी हुई थी मैं बस हल्का सा मुस्कुराया ! रात हुई ड्राइवर के साथ मैं फिर शेख साहब के घर गया वहा सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे ! देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ असल में रास्ते में ट्रैफिक जाम था , ये दिल्ली है बेटा ये सब आम बात है चलो तुम आ तो गए बेटी शबनम जाओ इसे हाँथ धुलवा दो खाने के लिए , जी अम्मी ! आईये , हाँथ धोने के बाद सब खाना खाने लगे काफी सारी बाते भी हुई सवालों और जवाबों का दौर चलता रहा खाने के बाद काफी बाते हुई मेरे और शेख शाहब के बिच असल में वो चाहते थे की मैं अदालत के कुछ तौर तरीको और सवालों और जवाबों को थोड़ा समझ लूँ उन्होंने साफ़ कह दिया की तुमने जो देखा वह तो तुम बता चुके हो लेकिन जब अदालत में होंगे तो तुम्हारी बात तभी मायने रखेगी जब तुम हर सवाल का जवाब सवाल को समझ कर बेहतर तरीके से दो मगर याद रहे इन सब से घबरा कर तुम कुछ उल्टा सीधा मत कह देना अगर तुम्हे सवाल समझ न आये तो चुप ही रहना ! मैं काफी देर तक उनकी हर एक बात सुनता रहा !

अच्छा जी अब मैं चलता हूँ काफी देर हो गयी है , ठीक है बेटा जाओ , अगर आप बुरा न माने तो क्या मैं संगीता से मिल सकता हूँ बस ज्यादा कुछ नहीं गुड नाईट कह देता , हाँ क्यों नहीं वो इस वक़्त छत पे होगी जाओ मिल लो -  सुक्रिया ! मैं ऊपर गया तो देखा संगीता रो रही थी मैं थोड़ा रुका और खांसा उसने तुरंत अपने आँसू पोछ लिए और खड़ी हो गयी ! अरे आप कब आये बस अभी थोड़ी देर पहले ही आप रो रही है ? नहीं तो , मुझसे झूट मत बोलिये आपकी आँखे बता रही है सब कुछ ! अरे नहीं वो तो मेरे आँखों में कचरा चला गया था तो उसी की वजह से कुछ आँसूं निकल आये सच सच बताइये क्यों रो रही थी आप आपने मुझे अपना दोस्त बनाया अब अगर आप मुझसे कोई बात छुपाएँगी तो मुझे लगेगा की आप सिर्फ मुझे दोस्त कहती है मानती नहीं है ! ऐसा नहीं है अफ़ज़ल , अगर ऐसा नहीं तो फिर बता दीजिये मुझे कम से कम आपका कुछ मन ही हल्का हो जाये बस कुछ अपने लोग याद आ रहे थे कितनी अजीब बात है न आज मेरे अपनों को ही मुझ पर भरोशा नहीं की मैं सच बोल रही हूँ और एक अंकल आंटी है जब उन्हें पता चला तो उन्होंने मुझे सपोर्ट किया अजीब है न कभी कभी खून के रिश्ते पराये से हो जाते है और कभी मुँह बोले रिश्ते खून के रिस्तों से भी ख़ास हो जाते है ! ये तो लोगो पर निर्भर करता है संगीता की वो अपने रिस्तों को कितनी अच्छी तरह से निभाते है और एक दूसरे को समझते है खैर तुम दुखी मत हो एक बार तुम ये कॅश जीत जाओ फिर सब तुम्हे अपना लेंगे ! पता नहीं शायद मेरे अपने मुझे अपना ले मगर क्या ये समाज और उसके लोग मुझे अपनायेंगे वैसे ही जैसे मैं पहले थी ! 

समाज भी तुम्हे आज नहीं तो कल अपना ही लेगा लेकिन किसी के भी तुम्हे अपनाने से पहले तुम्हे खुद अपने आप को अपनाना होगा अगर तुम खुद को नहीं अपना पाई फिर चाहे पूरी दुनिया तुम्हे अपना ले फिर भी तुम खुश नहीं रह सकती इसी लिए पहले खुद को अपनाओ ! तुम्हे ये अच्छी तरह से पता है की जो कुछ हुआ उसमे तुम्हारी गलती नहीं थी तुमने मना किया था उसे पर वो न रुका तुम्हारे इक्षा के विरुद्ध वह सब कुछ हुआ तो फिर बताओ मुझे किस आधार पर तुम अपने आप को दोषी ठहराओगी ! याद रहे संगीता तुम अकेली नहीं हो हम सब तुम्हारे साथ है मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा तुम हमारे हार मानने से पहले हार मत मानना देखो समाज तो पहले ही तुम्हे हारा हुआ समझता है तो क्यों न तुम ऐसे लड़ो अपने हक़ के लिए की एक मिशाल क़ायम हो जाये ! शायद तुम सही कह रहे हो ? अगर मैं सही कह रहा हूँ तो चलो ये आँसूं पोछो और खबरदार जो तुम फिर किसी के सामने या अकेले में रोई ! उसने हाँ में सर हिलाते हुए सर निचे कर ली 

अरे इतना लेट हो गया मुझे अब चलना चाहिए अच्छा अब इजाजत दे मुझे काफी देर हो गयी है और कल कोर्ट भी तो जाना है ! ठीक है चलिए मैं आपको निचे तक छोड़ आती हूँ ! सब लोग मुझे गेट तक छोड़ने आये बस एक शबनम ही नहीं थी उनमे मैंने पूछा तो उसकी अम्मी ने कहा वो आज जल्दी सो गयी है बस इसी लिए ,  ठीक है अब मैं चलता हूँ सबको सलाम करके मैं गाडी में बैठ गया और सबको बाए कर ही रहा था की शबनम ऊपर अपने टेरिस पे कड़ी हुई दिखी मैंने उसे देखते हुए अदब से थोड़ा सर को झुका कर सलाम किया उसने भी वही से मुझे सलाम की और फिर गाड़ी चल पड़ी होटल की तरफ जहा मैं ठहरा हुआ था !

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कहानी आगे जारी है। .........

नोट :- अगर आपने हमसफ़र का सातवाँ भाग नहीं पढ़ा है तो इस लिंक पे क्लिक करें
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Md Danish Ansari

Saturday, 10 March 2018

मान लिया X = ?

March 10, 2018 0 Comments


जब आपने ये टाइटल पढ़ा होगा तो आपको अजीब लगा होगा, है न की भला ये कैसा टाइटल है X = ? , जी हाँ ये बहुत कमाल का टाइटल है इसी टाइटल से हम सबकी जिंदगी जुडी हुई है आपकी मेरी आपके आस पास सभी मौजूद लोगो की !
मेरा एक सवाल है दर्द और दुःख क्या है ?
आप में से बहुत से ये लोग कहेंगे की जो शारीरक चोट हो तो दर्द होता है जैसे की अगर कोई आपको मारे तो आपको दर्द होता है टांग टूट जाये दर्द होता है चोट लग जाये दर्द होता है ! जब भावनात्मक चोट हो तो दुःख सही कहा न मैंने , लेकिन अगर मैं आपसे यह कहूँ की इस दुनिया में दर्द तो होता है मगर दुःख नहीं होता तो क्या आप यकीं करेंगे ! जाहिर है बहुत से लोग कहेंगे भला ये कैसे हो सकता है की दुःख हो ही न, हमारा कोई अगर अपना मर जाये तो दुःख नहीं होगा क्या कोई बहुत प्यारा अगर हमसे बिछड़ जाये तो दुःख नहीं होगा क्या ?
आपका सवाल सही है और इसी तरह के सभी सवालों का जवाब हमारे आज के टाइटल में छुपा है ***मान लिया X = ?***
दुःख हमे दो चीजो के वजह से होता है (1) पोजीशन (2) रिलेशनशिप
पोजीशन क्या है ?
माँ बाप भाई बहन मालिक नौकर अमीर गरीब पत्नी पति बेटा बेटी स्टूडेंट एम्प्लोयी मेनेजर क्लर्क बॉस कलेक्टर जज प्रधानमंत्री वगेरा वगेरा वगेरा , क्यों यही है न पोजीशन !
रिलेशनशिप क्या है ?
किसी भी पोजीशन पे रहते हुए जब आप दुसरे किसी पोजीशन वाले से किसी तरह जो व्यवहार करते हो उस व्यवहार से जन्मे मन मस्तिस्क के उत्तर को हम रिलेशनशिप कहते है !
समझ में नहीं आया न मैं आपको बताता हूँ ! आप अभी क्या हो आप एक आदमी या औरत है ठीक है लेकिन जैसे ही आप माँ बनती हो या पिता बनते हो बेटी या बेटा बनते हो तो फिर आप एक पोजीशन पे हो ! अगर आप शराब पीते हो तो आप अपने माँ बाप को या अपनी बीवी और बच्चो को नाराज करते हो फिर वो कहते है की आपने उन्हें दुःख पहुचाया ऐसा करके ! मगर सवाल यह है की आपके शराब पिने से भला उन्हें दुःख कैसे हुआ आपने उन्हें तो नहीं पिलाया अब इसे ही कुछ ऐसा करो की अगर आप शराबी हो तो किसी दुसरे शराबी को शराब पिला दो अपने रुपये से वो भी उसे फ्री में बिना उससे कुछ लिए तब वह क्या कहता है या आपके साथ कैसे व्यवहार करता है जाहिर है वह आपके इस व्यवहार से खुश हो जायेगा ! पर ऐसा हुआ क्यों एक तरफ आपके घर के लोग जहा नाराज़ हुए वही दूसरी और एक शराबी खुश हो गया कैसे ! यहाँ भी वही दो वजह काम करती है एक तो पोजीशन और दूसरा रिलेशन शराबी होना एक पोजीशन है अपने उसे शराब पिलाया वो रिलेशन के तहत है !
असल में हमारी पूरी ज़िन्दगी इन्ही दो चीजों से पूरी तरह घिरी हुई है और हम यह भूल जाते है की हम इंसान है हम अपने खुद को भूल जाते है और पोजीशन और रिलेशन के बिच फंस जाते है !
आप खुद सोचिये पति क्या है या बॉय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड क्या है या बेटा या बेटी क्या है और इन सभी की वजह से आपका दुःख क्या है पिता = व्यवहार, पत्नी = व्यवहार, बेटी = व्यवहार, बेटा = व्यवहार, बॉय फ्रेंड = व्यवहार, गर्ल फ्रेंड = व्यवहार, ये सभी X = ? में ही है जहाँ X = पोजीशन है , वहीँ ? = रिलेशनशिप है !
जब कोई लड़की आपको छोड़ के जाती है तो आप कहते है की आप दुखी हो मगर क्या यह सच है आपको दुःख इसलिए है क्योकि आप अभी भी उसी पोजीशन पे बने हुए हो यानि की बॉयफ्रेंड और आप खुद को दुखी इस लिए महसूस करा रहे हो क्योकि आप अभी भी उसी रिलेशनशिप से उम्मीद लगाये हुए हो ! हमे यह नहीं भूलना चाहिए की पोजीशन आती है जाती है और उसी के मुताबिक हमारा रिलेशनशिप भी बदलता रहता है ! एक गरीब कहता है वह बहुत दुखी है अपने गरीबी से मगर एक मिडिल क्लास खुद को उससे तुलना करके खुश  हो जाता है वही जब वो मिडिल क्लास का व्यक्ति किसी अपने से ज्यादा रुपये कमाने वाले से खुद को तौलता है तो फिर दुखी हो जाता है ठीक एक गरीब की तरह तो फिर बताइए गरीब क्या है और अमीर क्या है पोजीशन ही तो है वास्तव में हम सब इंसान है यह कहते तो है मगर मानते नहीं है कबूल नहीं करते की हम एक इंसान है और ये पूरी दुनिया एक रंग मंच है जहा हम सभी अलग अलग करैक्टर प्ले कर रहे है लेकिन यह हम पर निर्भर करता है की हम वह करैक्टर प्ले करना चाहते है की नहीं साथ ही हमे यह भी समझना होगा हर व्यक्ति अलग है उसकी सोच अलग है उसका पोजीशन अलग है उसका रिलेशन अलग है आप उनसे किसी भी चीज की उम्मीद सिर्फ तब तक कर सकते है जब तक वो उस करैक्टर को प्ले करता है अगर नहीं करता तो आप उससे उम्मीद नहीं करनी चाहिए बल्कि मेरा तो यही कहना है की हमे किसी से किसी भी चीज की उम्मीद नहीं करनी चाहिए मगर क्या वाकई नहीं करनी चाहिए ! जब आप ये उम्मीद करना छोड़ देंगे उस दिन आप सही मायनो में हर बंधन से मुक्त हो कर आज़ाद हो जाओगे मगर हम सब को यह ज़िन्दगी जीना पसंद है मुझे भी अगर ऐसा है तो फिर मैं आपको यह सब क्यों बता रहा हूँ ! इसकी वजह यह है की आप किसी भी पोजीशन और रिलेशनशिप के चक्कर में इतना न खो जाये की खुद के वजूद को ही भुला बैठे याद रखिये आप एक मुख्तालीफ़ इंसान है आपके जैसा न तो कोई पहले था और न अब है और न कभी कोई होगा ! जब भी आपको बहुत ज्यादा दुःख हो तो मेरे इस फोर्मुले को याद जरुर करना X = ? और देखिएगा आपको दुःख महसूस ही नहीं होगा !
हम बस मान लेते है की ये मेरा पति है ये मेरा बेटा है ये मेरी पत्नी है ये मेरी बेटी है ये मेरा बॉय फ्रेंड है ये मेरी गर्ल फ्रेंड है वगेरा वगेरा तो अगली बार याद रखियेगा इस फोर्मुले को – मान लिया X ( पोजीशन ) = ? ( रिलेशनशिप, व्यवहार )

नोट :- इस लेख में शराब या किसी भी नशीले पदार्थ का जिक्र करने का मतलब यह नहीं है की मैं उसे अच्छा मानता हूँ या उसका समर्थन करता हूँ ! नशा करना सेहत के लिए हानिकारक है !

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Md Danish Ansari

Thursday, 8 March 2018

औरत | Women's | Happy Women Day

March 08, 2018 0 Comments

औरत ये शब्द सुनते ही आपके मन मस्तिष्क में किसका चेहरा उभर कर आता है शायद माँ का, कहते है माँ ही वो जात है जो अपनी औलाद से बगैर स्वार्थ के मोहब्बत करती है और कोई नहीं बाकि सभी रिस्तो में कुछ न कुछ स्वार्थ होता ही है ! अब इस बात या विचार में कितना सत्य है और कितना झूट मैं नहीं जानता मैं तो बस इतना जानता हूँ की मेरी माँ मेरी परवाह करती है ! हर वक़्त बस हमारे बारे में सोचती है हमारे लिए जीती है कभी कभी तो ऐसा लगता है की ये माँ का कोई अपना वजूद भी है की नहीं बेशक उसी ने बच्चो को इस दुनिया में लाया मगर उसकी ज़िन्दगी उन्ही बच्चों के इर्द गिर्द घूमती रहती है और उन्हें पता भी नहीं चलता की कब वो उम्र के एक छोर से दूसरे छोर पर आ खड़ी हुई है !

सुना है औरत को कोई नहीं जान सकता और न ही उसके मन की अथाह गहराई को कोई माप सकता है पर ऐसा क्यों है ! शायद इसकी वजह यह रही हो की हमने कभी औरतो को अपने घर में और बाहर ऐसा माहौल बना कर ही नहीं दिया जिसमे वो अपनी बाते खुल कर रख सके ! कभी कभी जब वो अपनी बात रखती भी है तो घर और समाज दोनों बवाल करने लगते है यह सिर्फ किसी एक घर की कहानी नहीं और न ही किसी एक मुल्क की बात है यह हर तरह के समाज में आप देख सकते है फिर चाहे वह समाज या मुल्क कितना ही तरक्की पसंद हो या फिर कितना ही पिछड़ा हुआ ! अक्सर महिलाओं के कपड़ो को लेकर लोग जज करते है कमैंट्स पास करते है फिर उन्ही महिलाओं पे सबसे ज्यादा पुरुष फ़िदा भी होते है भले ही वह सिर्फ जिस्मानी जरूरियात लिए ही हो ! इससे एक बात तो तय होती है की हर वह पुरुष जो महिलाओं के छोटे कपडे पर ऐतराज जताता है मगर वही पुरुष अक्सर छोटे कपडे पहनी हुई औरतो पर डोरे डालता है तो वह उस औरत को सिर्फ अपने बिस्तर तक ही लाना चाहता है न की उसे अपनी बीवी बनाना !

ऐसे पुरुष सही मायनो में ढोंगी है जो समाज और घर परिवार में शराफत का मुखौटा ओढ़े रहते है और मौका मिलने पर सबसे पहले कपड़े उतारने में आगे होते है ! विद्या बालन जी की डर्टी पिक्चर में एक लाइन उन्होंने कही थी जब औरत अपने कपड़े उतारती है न तो सबसे ज्यादा मज़ा शरीफों को ही आता है ! मैं बस इतना कहूँगा की अगर कोई पुरुष इस लेख को पढ़ रहा है तो एक बार वो आत्म मथन जरूर करें की जिस तरह वो दुसरो की माँ और बहनों के साथ हमबिस्तरी होने को बेताब है तो क्या वो इस बात को भी तवज्जो देते हुए प्यार से क़बूल करेंगे की कोई और मर्द उनकी माँ बहन के साथ हमबिस्तरी हो ! यहाँ एक बात औरतों के लिए भी है जब आप अपना तन मन किसी को सौपने जा रही हो तो उससे पहले सामने वाले से ये जरूर पूछ लीजियेगा की जिस तरह मैं तुमसे मोहब्बत करती हूँ और तुम्हे अपना सब कुछ देने जा रही हूँ तो क्या तुम इस बात को स्वीकार करते हो की कल को अगर तुम्हारी बहन भी किसी को अपना सब कुछ सौपे अपनी मर्जी से तो तुम्हे उस पर कोई ऐतराज नहीं होगा ! अगर वह इस बात पे गुस्सा करें और आप पर चिल्लाये तो फिर अब आपकी मर्जी है की इसके बावजुद भी अगर आप उसे अपना सब कुछ सौंपना चाहती हो तो सौंप सकती हो ! लेकिन जहाँ तक मैं देख रहा वहा सिर्फ औरत की हार हुई है और हर उस पुरुष की जीत हुई जो औरत को अपनी निजी सम्पत्ति समझता है और सिर्फ एक सम्भोग मात्र वस्तु जो हाड़ मास से ज्यादा कुछ नहीं ! जिसमे न तो आत्मा है न कोई सोच न कोई भावना और न ही आत्म सम्मान वाली कोई और बात और हाँ प्लीज दुबारा फिर कभी औरतों के हक़ और उनकी बाते मत करियेगा क्योकि आप इस लायक नहीं रही क्योकि आप खुद औरत की हमदर्द नहीं बल्कि उसकी खुली दुश्मन है !

मेरे मुस्लिम भाइयों से सिर्फ इतना कहना चाहूँगा की अपने घर की औरतों और बाहर की औरतों पर पर्दा करने का पैगाम देने से पहले यह जरूर याद रखना औरतों को परदे के हुक्म से पहले खुदा ने तुम्हे अपनी नज़रों पर पर्दा करने का हुक्म दिया है ! मगर अफ़सोस मर्दों ने अपने नज़रों से पर्दा गिरा दिया और औरतों से इस बात की उम्मीद कर रहे है की वो पर्दा करें वाह क्या दोगलापन है खुद के चेहरे में कालिख लगी है और दूसरों को आइना दिखाते चल रहे है ! तुम अपनी आँखों पर पर्दा करों अपनी बहन से भी जब मीलों तो अपनी नज़रें नीची रखों पहले खुद का किरदार ऐसा बनाओं फिर अपने घर की औरतों से बाकि चीजों की उम्मीद करना अगर वो करना चाहे तो ठीक अगर न करना चाहे तो अल्लाह के हवाले क्योकि तुम्हारा अमाल और अमल तुम्हारे साथ और उनका उनके साथ ! मैं यहाँ किसी और धर्म के धार्मिक बातों का इस लिए उल्लेख नहीं कर रहा क्योकि मुझे नहीं लगता की यह सही होगा कही अगर भूल हो गयी तो खामखा का बवाल कौन अपने सर पे ले लेकिन इतना तो कह ही सकता हूँ की अगर औरत को देवी का स्वरुप मानते हो तो फिर उनसे अच्छा व्यवहार भी कीजिये किसी भूखे भेड़िये की तरह लार टपकाना बंद कीजिये !

वो मर्द जो औरत को नोच लेना चाहते है उसके जिस्म के हर एक गोस्त को नोचने के लिए लार टपका रहे नज़रों में हवस इतनी है की कुछ और नहीं देख पा रहे है तो उनसे सिर्फ इतना कहूँगा अगर दूसरों की बहन तुम्हे नज़र आ रही है तो दूसरों को भी तुम्हारी माँ और बहने नज़र आ रही है अगर तुम हैवान बन सकते हो तो भूलना मत उन्हें भी अपने अंदर के शैतान को बाहर लाने में कुछ ख़ास वक़्त नहीं लगेगा मगर इन सब के बिच तो अदरक की तरह औरत ही है अब यह औरतों पर है की वह क्या होना चाहती है अदरक या सही मायनों में औरत , एक ऐसी औरत जो अपने हक़ की लड़ाई खुद लड़े न की किसी से मदद की उम्मीद मैं बैठे रहे की कोई आएगा और उनसे कहेगा मैं तुम्हारे साथ हूँ तुम लड़ो ! भाड़ में गयी दुनिया और दुनिया वालो की मदद अगर तुम खुद की मदद नहीं कर सकती तो ईश्वर भी तुम्हारी मदद नहीं कर सकता !


दुनिया भर की औरतों को समर्पित जो अपने अपने हक़ की लड़ाई लड़ रही है फिर चाहे वह छोटी लड़ाई हो या बड़ी उन्हें भी समर्पित जो खूब लड़ी और हार गयी मगर कोशिश जरूर की बिना कोशिश किये हार जाने से बेहतर है कोशिश करते हुए शिकस्त हो जाना !


नोट :- अगर आप भी अपनी कहानी या कोई लेख या कविता गीत हमारे साथ शेयर करना चाहती/चाहते है तो आप मुझे अपना खुद का लिखा हुआ हमे  md.ansari.da@gmail.com  पर मेल करें अगर आप चाहती / चाहते है की आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएँ तो आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी ! आपका दोस्त आपका भाई मोहम्मद दानिश अंसारी !
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Md Danish Ansari

Tuesday, 6 March 2018

हमसफ़र | Humsafar Part-7

March 06, 2018 0 Comments

अगली सुबह मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गया मैंने एक होटल में कमरा बुक किया फ्रेश हुआ और संगीता को कॉल किया ! हाँ अफ़ज़ल जी कैसे है आप इतनी सुबह कैसे कॉल कर दिया आपने ? मैं दिल्ली में हूँ ! क्या आप मजाक कर रहे है , है न! जी नहीं मैं वाकई दिल्ली में हूँ और महाराजा पैलेस में ठहरा हूँ !  अब आप मुझे बताइये की मुझे आगे क्या करना है ? आप वही रुकिए मैं खुद आपके पास आती हूँ ! मैं तब तक नहा धो कर फ्रेश हो गया करीब ग्यारह पैतालीस पे डोर बेल बजी मैंने दरवाजा खोला तो एक लड़की सामने खड़ी थी , जी कहिये ? तभी साइड से वो सामने आयी ! ये मेरी नज़रो का धोखा था या फिर मैं इतने सालो बाद संगीता को देख रहा था उसका असर वह पहले से बहुत ज्यादा बदल चुकी थी और काफी खूबसूरत भी लग रही थी ! गुड मॉर्निंग , उसने कहा ! मैंने रिप्लाई किया , कैसी है आप ? अब सारी बाते यही दरवाजे पर करोगे या हमें अंदर भी आने के लिए कहोगे ? ओह सॉरी , प्लीज आईये न अंदर बैठ कर बाते करते है ! वो अंदर दोनों अंदर आयी , अफ़ज़ल ये है मेरी सहेली शबनम ! सलाम वालेकुम , वालेकुम सलाम प्लीज् आप लोग बैठिये न।   क्या लेंगी आप दोनों कॉफी या चाय ? जी सुक्रिया हम घर पे पी लिए है ! 
तो अब बताइये मुझे क्या करना होगा ? अगर आप तैयार हो तो आप हमारे साथ चलिए वकील से पहले आपको मिलाना वो जो भी पूछे आप उसका सीधा सीधा जवाब दीजियेगा उसके बाद ही वही बताएँगे की आगे हमे अब क्या करना है ! जी ठीक है। 
हम होटल से निकल गए बहार संगीता की सहेली गाड़ी में पीछे बैठी थी ! ये कार किसकी है ? मेरी सहेली की आइये ! मैं आगे की सीट पर बैठ गया और संगीता और उसकी सहेली पीछे बैठ गयी , शबनम ने कहा - गफूर भाई घर चलिए ? आपने तो कहा था की वकील से मिलने जा रहे है ! जी हाँ वही तो जा रहे है मेरे अब्बा वकील है और वही संगीता का केस लड़ रहे है तो अब हम चले ! जी ! मैं शबनम के घर गया वह उन्होंने मुझे शबनम के अब्बा से मिलवाया उन्होंने तो सलाम और दुआ के बात पुरे सवालों का लाइन लगा दिया उनके सवालो का जवाब देते देते मुझे जोरो की भूख लग गयी नास्ता भी नहीं किया था वैसे भी दोपहर के खाने का वक़्त तो हो ही गया था ! जब उनके सवालों और जवाबों का दौर ख़त्म हुआ तो फिर उन्होंने मुझे खाने पे दावत दिया वैसे भी मैं अंदर से बहुत ज्यादा भूखा था मगर क्या करता तहज़ीब नाम की भी कोई चीज़ होती है पहले तो मैंने मना कर दिया फिर उन्होंने मुझे दावत दिया तो फिर मैं मान गया हम खाने के टेबल पे थे खाना लगा और सब खाना शुरू कर दिए और मैं उन्हें देखता रहा ! वो इसलिए क्योकि वो छुरी और काँटों और चमचों से खा रहे थे जो मुझे पसंद नहीं मेरा भूख भी नहीं मिटती !
मुझे खाता न देख कर संगीता ने कहा आप कुछ खा क्यों नहीं रहे है कोई दिक्कत है क्या ? जी नहीं ! फिर मैंने न आओ देखा न ताओ सीधा अपने आस्तीन मोड़े और खाना शुरू कर दिया मुझे हाँथों से खाता देख शबनम जी के अब्बा मुस्कुरा बैठे और उनकी अम्मी रसीदा खातून भी मैं पूरा ध्यान खाने में लगाया और बस मजे से खाता रहा बाद में मुझे बहुत बुरा भी लगा और हंसी भी आयी बुरा इसलिए की वो मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे और हंसी इसलिए की मैं खुद पे ही हँसे जा रहा था ! खाना खा लेने के बाद शेख साहब ने कहा की हम कुछ देर के बाद पुलिस स्टेशन जायेंगे वह भी आपको वही बाते बतानी है जो तुमने मुझे बताई है उनका रवैया कड़क भी हो सकता है और नरम भी तुम बोल तो पाओगे न वहाँ वैसे हमारे पास तुम्हारे अपने शहर के पुलिस वालो को दिए बयां की कॉपी तो है लेकिन यहाँ की पुलिस भी तुम्हारा बयां लेगी तो तैयार रहिएगा ? जी बेशक !


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कहानी आगे जारी है। .....

नोट :- अगर आपने हमसफ़र का छटवाँ भाग नहीं पढ़ा है तो इस लिंक पर क्लिक करें 


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Md Danish Ansari

Monday, 5 March 2018

मजदुर | Workers

March 05, 2018 0 Comments

इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में अब मैं खुद को अकेला महसूस करने लगा हूँ ! हर वक़्त मेरे आस पास लोगो का हुजूम होता है मगर फिर भी अकेला महसूस करता हूँ हर रोज एक ही काम घर से दफ्तर और दफ्तर से घर बस इन्ही दो जगहों में मेरी ज़िन्दगी घूंट कर रह गयी है और बड़ी तेजी से वृद्धावस्था की तरफ जा रही है ! मगर मेरा शरीर जवान है मगर उसमे वो जोश नहीं बचा जो युवावस्था में होता है मन जो चंगा होना चाहिए वो उदास है !
पुरानी ज़िन्दगी बहुत याद आती है जेब में रुपये नहीं थे मगर मन खुश था हर समय उमंग से भरा रहता मगर अब वो सारे उमंग कही खो गए है या फिर दब के रह गया है ! ऑफिस का माहौल भी कोई खुशनुमा माहौल नहीं है हर वक़्त बस एक ही शब्द हर किसी के दिमाग और ज़बान पर होती है वो है टारगेट ! दिन गुजरते है हफ्ते में  हफ्ते गुजरते हुए महीने में बदल जाते है सब कुछ बदल रहा है अगर नहीं बदलता तो वो है ऑफिस और इस मन की वो अवस्था जिसमे सबका हर्ष और उल्लास दफ़्न हो चूका है ! छोटे शहरों में रोजगार कम होता है और जो होता है उसमे रोजगार देने वाला मालिक इतनी सैलरी भी नहीं देता की उससे किसी का घर अच्छे से चल सके और उसमे भी मालिक यह पूरी कोशिश करते है की उसी कम सैलरी में हम कैसे मजदूरों की मेहनत और हुनर का एक एक बून्द निचोड़ ले फिर चाहे मजदूर या एम्प्लोयी अवसाद से ग्रस्त हो जाये या फिर उसकी सेहत बिगड़ जाये !

मैं अच्छी तरह जानता हूँ की जब आप मेरे इस लेख को पढ़ रहे होंगे तो यह कह रहे या सोच रहे होंगे की अगर काम करने वाली जगह में इतनी ही प्रॉब्लम है तो फिर काम छोड़ क्यों नहीं देते ! यकीं मानिये आप इस लेख को पढ़ने के बाद शायद एक बार या दो बार काम छोड़ने की बात कहे मगर सच यह है की मुझ जैसे लाखो नहीं बल्कि करोड़ों मजदुर और एम्प्लोयी है जिनके दिमाग में हर रोज और दिन भर में कई बार ये ख्याल आता है मगर बेरोजगारी इतनी ज्यादा है की कोई भी इस ख्याल पे अमल करने से डरता है ! मेरे देखते ही देखते मेरे बहुत सारे ऑफिस के एम्प्लोयी काम छोड़ दिए और जब उन्हें कोई काम न मिला तो फिर उसी ऑफिस को ज्वाइन कर लिए ! ऐसा जब होता है तो मालिकों का साहस बढ़ जाता है अपने एम्प्लोयी के शोषण को लेकर उसका खुराफाती दिमाग हर समय नए नए तरीके इजात करता  है मजदूरों की पूरी क्षमता को निचोड़ लेने के लिए , मैं आपको इन मालिकों के खुराफाती दिमाग की एक उपज के बारे में बताता हूँ -

आप मुझे बताइये - मान लीजिये आप किसी वजह से महीने के कई दिन ऑफिस नहीं गए क्योकि आप बीमार थे या फिर कोई फॅमिली इशू की वजह से तो जाहिर सी बात है ऐसी स्थिति में आपकी सैलरी कटेगी और यह सही भी है अब आप वापस काम पे आते है और पूरा जी तोड़ मेहनत करते है अपने टारगेट को पूरा करने के लिए और आप पूरा कर भी लेते है ! मगर अब जब बात इंसेंटिव यानि प्रोत्साहन राशि की आती है तो फिर से आपका मालिक आपके इंसेंटिव काट लेता है उतना जितने दिन आपने छुट्टी ली इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप छुट्टी के लिए आवेदन दे कर गए थे या फिर बिना बताये गए थे बस आप छुट्टी पे थे इस लिए आपका इंसेंटिव यानि प्रोत्साहन राशि काटी जाती है ! 

अब आप मुझे बताइये क्या यह किसी भी तरीके से न्याय संगत है की एक एम्प्लोयी जो छुट्टी पे था आपने उसकी सैलरी भी काटी और फिर उसका इंसेंटिव भी काटा - इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वह मजदुर या एम्प्लोयी छुट्टी बता कर किया था या बिना बताये !

मैं आपसे पूछता हूँ की दुनियाँ भर में जितने भी मजदुर है जितने भी ऑफिस वर्कर है उन्हें इंसेंटिव अटेंडेंस की वजह से मिलती है या उनके टारगेट अचीवमेंट की वजह से , जाहिर है उनके टारगेट अचीवमेंट की वजह से तो फिर छुट्टी करने पर जब मालिक सैलरी से रुपये काट लेता है तो क्या उसे यह अधिकार है की वह उनका इंसेंटिव भी काटे , जाहिर है नहीं ! अब आप में से बहुत से लोग यह सोच रहे होंगे की अगर ऐसा अन्याय हो रहा है तो एम्प्लोयी कोर्ट क्यों नहीं जाता , मगर इसमें भी एम्प्लोयी की ही हार है अगर वह कोर्ट जायेगा तो उसका बहुत सा समय वही गुजर जायेगा वो काम कब करेगा और कमाएगा कैसे क्योकि तब तक तो उसकी नौकरी भी जा चुकी होगी !

मजदुर जल्दी से हड़ताल नहीं करना चाहते क्योकि उन्हें इस बात का अंदाज़ा है की अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली सारी बाते और सारी हीरोपंती सिर्फ किताबों में अच्छी लगती है हकीकत की दुनियाँ में नहीं मजदुर अगर एक हो भी जाये तो भी ये मील मालिक सरकार से हाँथ मिला कर इन मजदूरों के हाँथ पैर तोड़वाने का इन्हे बुरी तरह कुचल देने का पूरी कोशिश करते है और इसी बिच मजदूरों और एम्प्लोयी की माली हालत बिगड़ चुकी होती है जो उसे घुटने टेकने पर मजबूर करती है !

जब मजदुर विरोध प्रदर्शन या हड़ताल करता है तो वह न तो पुलिस की मार से टूटता है न ही मील मालिकों के अलग अलग हथकंडो से वह टूटता है तो खुद के अंदर बन रहे उस हालात से जो उसके परिवार को भूखा सोने पर मजबूर कर देते है ! दुनियाँ भर में लोग कुचले जा रहे है और वो पढ़े लिखे लोग जिन्हे यह दायित्व सौंपा गया था की वह हमारे अधिकारों की रक्षा करेंगे वो मालिकों के साथ मिलकर जल्लाद हो गए , सिर्फ कहने और दिखने के लिए ये राम होते है मगर हकीकत में ये रावण से ज्यादा आगे है ! वरना आप खुद सोचिये की जिस नोटबंदी में पुरे मुल्क के लोगो की आय में कमी हुई वही सिर्फ एक प्रतिशत पूंजीपतियों की आय में छब्बीस से सत्ताईस प्रतिशत की वृद्धि हुई क्या आप बता सकते है यह कैसे हुआ होगा ?

यह सिर्फ एक छोटा सा सच्चा उदाहरण था आपके लिए। ........ और इन्ही सब के बिच मैं हर रोज की तरह हारा हुआ थका हुआ और मरा हुआ घर पहुँच जाता हूँ सिर्फ सोने के लिए क्योकि इतनी ताक़त नहीं होती शरीर में की किसी से बात भी की जाये और गलती से किसी ने बात करने की कोशिश की तो ऐसे झुँझला उठता हूँ जैसे पता नहीं कितनी बड़ी बात हो गयी हो !
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Md Danish Ansari