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Saturday, 19 January 2019

सुना है

January 19, 2019 0 Comments
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सुना है उसके हुस्न पे कुदरत को नाज़ है
तो चलो उनका दीदार करके देखते है
सुना है उसकी नज़ाकत पर फूल भी कुर्बान है
तो चलो उसके नखरे उठा कर देखते है
सुना है उसके रुक्सार पे घटाए अंगड़ाइयाँ लेती है
तो चलो उन रुक्सार को जरा छू कर देखते है
सुना है उसकी जुल्फ पर जिन्नो परियों का बसेरा है
तो चलो उन जिन्नो परियों से मुलाकात करके देखते है
सुना है वो मुस्कुराये तो बहारें खिलखिलाती है
तो चलो उन बहारों को जरा छेड़ के देखते है
सुना है उसके कदम जहा भी पड़े वो ज़मीं हरी भरी हो जाए
अगर ऐसा है तो चलो उसे अपने दिल में ठहरा के देखते है
कहते है वो मेहमान नवाज़ी में सबसे आला है
तो चलो हम भी उनके मेहमान बन के देखते है
सुना है जब वो गाती है तो चिड़ियाँ सूर मिलाती है
तो चलो हम भी उसके सूर में सूर मिला के देखते है
सुना है जब वो बात करती है किसी से, तो उसका सब कुछ जीत लेती है
अगर ऐसा है तो चलो हम भी अपना दिल हार के देखते है
सुना है जब रात को उसकी आँखें नींद से बोझल हो जाती है
तो ख़्वाबों के मेले उसकी आँखों में लगते है
अगर ऐसा है तो चलो उसके ख़्वाबों में खुद को शामिल करके देखते है
सुना है उसकी आँखों में खंजर-वंजर चाक़ू-वाकु छुरियाँ-वूरियाँ सब कुछ है
तो चलो हम भी अपना सीना-विना दिल-विल सब आज़मा के देखते है
सुना है उसके शहर में उसे अब भी किसी का इंतज़ार है
तो चलो फिर हम भी अपनी किस्मत आज़मा के देखते है

*****
Md Danish Ansari

Monday, 7 January 2019

झगड़ालू दोस्त - Quarrelsome friend

January 07, 2019 0 Comments
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जो बात बात पर मुझसे लड़ती वो थी तुम 
पहले खुद ही लड़ती फिर सॉरी भी मुझी से कहलवाती ऐसी थी तुम 
जिसके हर कॉपी पे कहीं न कही मेरा नाम था, वो थी तुम
कभी कभी तो ऐसे लड़ती जैसे मार ही डालेगी 
फिर दूसरे दिन खुद ही पहले से आ कर बात करती 
और कहती - आज कल तेरे बड़े भाव चढ़े हुए है क्यों 
हम इतना लड़े और फिर एक हुए की 
सब यही कहते इनका कुछ समझ ही नहीं आता 
लड़ते है ऐसे की एक दूसरे के जानी दुश्मन 
और दोस्ती ऐसी की दाँत काटी रोटी
पर अब सब बदल रहा, तुम भी और मैं भी 
हमारे रिस्ते बदल रहे है और व्यवहार भी 
कभी जो मैं तुमसे बेधड़क मिलता था 
अब अदबो आदाब का ख्याल करता हूँ 
तुम मिलती हो बड़ी दूर से सलाम करती हो 
तुम हो तो वही मगर अब वो बात पहले जैसी नहीं
मैं भी वही हूँ मगर मुझमे भी वो बात नहीं 
हम दोनों का रिस्ता खुला बेबाक और बेधड़क का रहा 
 अब ये अदब तहज़ीब और दुरी दीवार की तरह लगती है
मगर सच तो यही है की, नए रिस्तो ने 
तुम्हे और मुझे बाँध रखा है और 
मैं भी अब इसी नए रिस्ते के साथ जीने की कोशिश करता हूँ 
ये समझने की कोशिश करता हूँ की 
पहले क्या था और अब क्या है 
वक़्त के साथ साथ सब कुछ बदल रहा है 
मैं भी तुम भी और हमारे रिस्ते भी 
मगर एक बात दिल से कहता हूँ 
अब तुम जैसा कोई नहीं है मेरे पास 
जो मुझसे लड़े मुझी से सॉरी भी कहलवा ले 
तुम्हारे साथ एक नया हमसफ़र है 
मगर मैं अब भी अकेला हूँ, और 
यही सोचता हूँ की मुझे जो हमसफ़र मिलेगा 
वो कैसी होगी, तुम्हारी जैसी या फिर तुमसे अलग 
और क्या वो मेरे साथ वैसे ही खुल कर 
ज़िन्दगी जियेगी जैसे हमने कभी जी थी 
या फिर इन नए रिस्तो में बंध कर, मेरी हमसफ़र बनेगी 
मुझे रिस्तेदारो से दिक्कत नहीं और न ही नए रिस्तो से 
बस डरता हूँ के नए रिस्ते कही मुझे घुटन न दे दें 
मैं बस इतना चाहता हूँ, चाहे जो भी हो 
मेरा हमसफ़र मेरे साथ खुलकर जिए 
मुझसे बराबरी का हक़ रखे 
न तो वो दब के रहे और न मुझे दबाये 
वो खुल कर अपनी बात कहे बिना संकोच 
भले ही मैं उससे सहमत रहूँ या न रहूँ 
और उससे भी मैं बस इसी बात की उम्मीद करता हूँ 
लेकिन चाहे कुछ भी कहो, वो तुम्हारी जगह कभी नहीं ले सकती 
क्यों की तुम तुम थी और वो, वो होगी 
उसका वजूद कुछ और होगा और तुम्हारा कुछ और है 
तुम मेरी सबसे अच्छी पहली दोस्त थी हो और हमेशा रहोगी 
तुम्हारी खुशियों की दुआ करने वाला तुम्हारा दोस्त 
जो तुमसे लड़ा भी और तुम्हे मनाया भी, 
बस इतनी सी इल्तेज़ा है, मुझे अपनी दुआओं में याद रखना 
क्योकि आगे ज़िन्दगी के सफर में तुम नहीं होगी 
लेकिन मैं चाहता हूँ तुम्हारी दुआएँ हमेशा मेरे साथ रहे 
कभी धुप में साये की तरह तो बरसात में छत की  तरह 
ठण्ड में गर्मी की तरह, और हमेशा मेरी परछाई की तरह 
तुम नहीं तो तुम्हारी दुआएँ मेरे साथ रहे 
मुझे याद रखना तुम्हारा झगड़ालू दोस्त !

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Md Danish Ansari

Wednesday, 8 August 2018

फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है

August 08, 2018 0 Comments
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तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है 
एक मोटी परत है धूल की मगर देखो 
उसमे भी तेरे नाम के हर्फ़ बाकि है 
कभी उभरता है तो साफ़ दीखता है 
कभी छुपने की नाकाम कोशिश करता है
कभी मेरे पीछे बेसुध दौड़ पड़ता है 
तो कभी छुप छुपा कर पीछा करता है 
अजीब दास्ताँ है मेरी और तेरी यादों का 
कभी खिलती धुप की तरह है, तो 
कही टिमटिमाती लौ की तरह है 
सच कहता हूँ। ....... 
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है 
कभी तड़पता हूँ तो कभी खुश होता हूँ 
कभी रूठता हूँ कभी खुदी को मनाता हूँ 
शहर-ए-यार में इन आँखों ने हुश्न का दीदार बहुत किया है 
मगर इस दिल ने एक तेरे सिवा किसी से न वफ़ा किया है 
किसी भूली बिसरी कहानी की तरह है 
फिर भी यहाँ तेरी यादों के निशाँ बाकि है
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है। 

*****

Md Danish Ansari

Thursday, 5 July 2018

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी

July 05, 2018 0 Comments
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कई बार सोचा है मैंने इस बारे में

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी 
क्या पुरानी बातें फिर से उखड़ने लगेगी
या नए रिस्तों के साथ नई बातें होगी
अक्सर सोचता हूँ 
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी 
क्या पुरानी शिकवे और शिकायते होगी
या नई चाहतो और मंज़िलों की बाते होगी
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी 
क्या मस्जिदों की अज़ाने और मंदिरों की 
आरती भी साथ होगी
या फिर सहरा के सन्नाटो में बात होगी
मैं अक्सर सोचता हूँ इस बारे में
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी
क्या तुम पहले की ही तरह मुझसे मिलोगी
या फिर जमाने की बंधनो में जकड़ी हुई 
सुगबुगाहटों भरी बातें होगी
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी
तेरी आँखों में कशिश क्या अब भी वही है
क्या उनमे अब भी ऊँची लहरें उठती है
क्या उसमे अब भी वही कशिश है
जो जमाने को ठहरने पे मजबूर कर दे
क्या तेरे किरदार में अब भी वो भोलापन है
जो पत्थर को पिघलने पर मजबूर कर दे


कई बार सोचा है मैंने इस बारे में

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी 

*****

Md Danish Ansari

Sunday, 24 June 2018

Tu Khwaab Hai Bahut Khubsurat

June 24, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh

Tu   khwaab   hai.....  bahut   khubsurat 
Tujhse  hai   kyun    mujhko   mohabbat
Chahun...  tujhe...   maangu...   tujhe.. 
Har  dua  me  hai  fir  bhi  adhura  main
Khwaab hi to hai gujar kyun  nahi jaata
kyun  is  dil  me  meri  kasak   rahi  jata
Aana  hai  to  aa  kyun  tadpaye   mujhe
Kyun chhede mujhe kyun sataye mujhe
Bahut   khubsurat   khwaab   hi   to   hai
Tujhse  hai  fir   kyun  mohabbat  mujhe
Din raat   jaagu.....  bas   ek   tere   liye 
Neend  hai  ke  bojhal   ab  bhi   mujhpe
Palke hai meri ke  bas jhuk jhuk hi jaati
Aankhen hai fir  bhi Sone  ko nahi  jaati 
Dil  hai   ke   bas    Dhadakta   hi   rahta 
Or  khyaal  ke  roku  fir   bhi  rukti  nahi
Tu khwaab   hai.....  bahut   khubsurat... 
Tujhse   hai   kyun   mujhko   mohabbat
Ek   dhuan  hi  dhuan  bas  chaaro  taraf
Bhatak  rahi hai jaan meri hiran ke jaise
Adhure   khwaab   se...   itni   mohabbat
Na  dekha hai maine na suna  hai ab tak
Tu  khwaab  hi  to  hai bahut  khubsurat
Tujhse  hai  fir  kyun mujhko mohabbat

*****

Md Danish Ansari

Thursday, 14 June 2018

सुबह जब तुम्हे देखता हूँ

June 14, 2018 0 Comments
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सुबह जब तुम्हे देखता हूँ तो बहुत खुश हो जाता हूँ
एक अलग ताज़गी और  जोश से पूरा भर जाता हूँ
बड़ा बेताब  रहता है  मेरा  दिल  तुझसे  मिलने को
तेरी हर एक  मुस्कुराहट पर मैं  कुर्बान हो जाता हूँ
तुम्हारी   आँखों  में   कोई  खूबसूरत   सा  जादू   है 
जिधर   को   देखती  है   उधर  को   ठहर  जाता  हूँ 
बात करती हो तो एक  अलग ही दुनिया में होता हूँ 
उस  दुनिया  में बस  एक तुम  हो और  एक  हम है 
ये  खूबसूरत  एहसास मेरे  दिल के  बहुत करीब  है 
मैं  तुम्हे   कैसे  बताऊँ   तुम्हे   कितना   चाहता  हूँ 
मुझे तो खुद ही नहीं पता के तुम्हे कितना चाहता हूँ 
कभी कभी ये  सारे सवाल मुझे  अटपटे से  लगते है 
फिर भी  अगर ये  तुम्हारे लिए  एहमियत  रखते है 
तो मैं तुम्हे बताना चाहता हूँ 
समंदर की  गहराई से  ज्यादा है  तुमसे मोहब्बत 
आसमान की ऊँचाई से ज्यादा है तुमसे मोहब्बत 
हवा  की  ताज़गी  से  ज्यादा  है  तुमसे  मोहब्बत 
आग  की  तपिश  से  ज्यादा  है  तुमसे  मोहब्बत 
सितारों की  रौशनी से  ज्यादा है  तुमसे मोहब्बत 
चाँद  की  चाँदनी   से  ज्यादा  है  तुमसे  मोहब्बत 
मगर  सच   कहूँ   तो  यह  सब   कुछ   बेमानी  है 
क्योकि   मेरी   मोहब्बत    इनमे    से   कोई   भी 
न तौल सकता है और न ही उसको मोल सकता है
तुमसे मैं बस इतना ही कहना चाहता हूँ
सुबह जब तुम्हे देखता हूँ तो बहुत खुश हो जाता हूँ
एक अलग  ताज़गी और  जोश से पूरा भर जाता हूँ

*****
Md Danish Ansari

Friday, 8 June 2018

बड़े दिनों के बाद मैंने कुछ लिखा है

June 08, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh

बड़े दिनों के बाद मैंने कुछ लिखा है 
कुछ बातें लिखा है कुछ शिकायतें लिखा है 
तुम्हारे आने से लेकर तुम्हारे जाने तक का सफ़र लिखा है 

लिखा है मैंने के कैसे तुम बहार बन के आये 
ये भी लिखा के कैसे तुम मुझ पर बरसात बन के आये  
ये भी लिखा की चिलमिलाती धुप में कैसे तुमने छाव दी मुझे
कभी जुल्फों से साया किया तो कभी आँचल से साया किया 

ये भी लिखा है के कैसे किसी से बात न करते करते 
तुम्हारे साथ बैठे बिठाये खिलखिला गए 
लिखा है मैंने हर एक दास्ताँ हमारी मुलाकातों का  
लिखा है मैंने ये भी कैसे हम एक दुसरे के करीब आ गए 
सब कुछ लिखा है बस ये नहीं लिखा के 
कब क्यूँ कहाँ तुम मुझसे बेवफा से हो गए 
क्यों उन सारी बातों का वजूद मिटने लगा 
क्यों उन सभी वादों का सफ़र ख़त्म होने लगा 

क्यों सारी बातों की कशिश फ़ना हो गयी 
क्यों हर मुस्कराहट चीख ओ पुकार और आहों में बदल गयी 
सब कुछ लिखा है मगर तेरी बेवफाई लिखी न गयी 
तेरे टूटते वादों की चीखो पुकार लिखी न गयी 
लिखी न गयी मेरे आँखों में मरती हर उम्मीद की तकलीफ 
न लिखी गयी मुझसे मेरे जज्बातों की ख़ामोशी 
न लिखे गए मुझसे मेरे टूटते ख्वाबों के मंज़र 
न लिखे गए मुझसे मेरी मरती मोहब्बत के मंज़र 
सारी गालियाँ बद दुआएँ मैंने अपने नाम लिखा है और 

सारी तारीफे और दुआएँ तेरे नाम लिखा है 
मुझे ये अब भी गवारा नहीं के कोई तुझे गलत कहे 
मुझे यह गवारा नहीं के तुझसे कोई नफरत करे 
मुझे यह भी गवारा नहीं के तू ज़माने भर में बदनाम हो 
हाँ मैंने सब कुछ लिखा है बस तेरी बेवफाई नहीं लिखी 
तुम भले ही मुझे सबके सामने जलील करो 
मगर मैं किसी से तुम्हारा सच न कहूँगा 
मेरे लिए यह काफी है के सच तू जानती है 
बड़े दिनों के बाद मैंने कुछ लिखा है 
तुम्हारे आने से लेकर तुम्हारे जाने तक का सफ़र लिखा है 

*****
Md Danish Ansari

Wednesday, 6 June 2018

आज किसी खुशबु से मुझे मिलना है

June 06, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh

आज बहारों की बहार से
रंगो की मुस्कान से
आज मुझे मिलना है
आज किसी खुशबु से मुझे मिलना है
कोई तो बताओ जरा उनसे कैसे मिले
क्या पहन के जाऊँ
क्या संवर के जाऊँ
चेहरे पे मुस्कान और
दिल में घबराहट ले के जाऊँ
कोई तो बताओ जरा उनसे कैसे मिले
आज किसी खुशबु से मुझे मिलना है
क्या कुछ तोहफे उसके नाम
ले के जाऊँ
या फिर यूँही बस खाली हाँथ
ले के जाऊँ
क्या उसकी तारीफ में कुछ
अलफ़ाज़ कह जाऊँ
या फिर यूँही खामोश चुप चाप
हो के गुजर जाऊँ
आज किसी खुशबु से मुझे मिलना है
कोई तो बताओ जरा उनसे कैसे मिले

नोट : खुशबु = महक 

*****
Md Danish Ansari

Wednesday, 30 May 2018

वो एक पहली नज़र

May 30, 2018 0 Comments

वो एक पहली नज़र जो तुझपे पड़ी 
गुम  हुआ  हाँ  मैं  गुम  हुआ 
तुम मानो ना मानो ये जो दिल है 
सिर्फ  तुझे  ही, चाहे..................
मुझसे जो की तुमने बात 
आया नहीं मुझको कुछ भी ख्याल
सुनते रहे बस तेरी ही बाते 
उलझी हुई थी ये मुलाकाते 
वो एक पहली नज़र जो तुझपे पड़ी 
गुम  हुआ  हाँ  मैं  गुम  हुआ 
क़रीबियाँ थी फिर भी दूरियाँ थी 
समझोगे तुम कैसे समझाऊँ कैसे 
हर याद तुझसे मुझसे जुडी है और 
हर बात तुझसे शुरू मुझपे ख़त्म हुई
फिर यूँ एक दिन कुछ जादू सा हुआ 
तेरी आँखों मैं कुछ तो जादू सा हुआ 
होंठ खामोश थे फिर आँखें बोलती 
लबो पे तुम्हारी दबी मुस्कुराहटें थी 
और फिर तुम बहुत करीब आके 
कानो में कह गयी क्या................
वो एक पहली नज़र जो तुझपे पड़ी 
गुम  हुई  हाँ  मैं  गुम  हुई 
मानो न मानो चाहती हूँ तुमको 
खुद से भी ज्यादा मानती हूँ तुमको 
जानती हूँ मैं भी चाहते हो मुझको 
कहते फिर क्यों नहीं जो कहना चाहो 
फिर...... फिर क्या हुआ ???
फिर यूँ कुछ हुआ जादू हुआ 
जो भी हुआ बहुत अच्छा हुआ 
वो एक पहली नज़र जो तुझपे पड़ी 
गुम  हुआ  हाँ  मैं  गुम  हुआ 
हाँ मुझे तुमसे मोहब्बत हुई..... 
हाँ मुझे भी तुमसे मोहब्बत हुई


*****
Md Danish Ansari


Thursday, 24 May 2018

Bade Din Huye Tumse Baat Nahi Hui...

May 24, 2018 0 Comments

Bade din huye tumse baat nahi hui
Na hii na hello or na hi koi faltu sa joke bheja tumne
Is bich lagataar baar baar maine tumse baat karna chaha
Magar tumse koi reply ki umeed hi nahi rahi
Shayad ab tum bhi mujhse ubb gayi ho
Shayad tum ab apni zindagi me badi mashruf ho gayi ho
Shayad ab hum, tumhare akelepan ke sathi nahi
Shayad tujhe mujhse behtar koi mahfil mil gayi ho
Pahle to kabhi aisa hua nahi fir ab kyun
Shayad waqt badal gaya or tumbhi badal gayi ho
Mujhe yaad hai tumne ek baar kaha tha mujhse
Jo waqt ke sath badalta nahi wo fana ho jaata hai
Tumne hi kahi or tumne hi amal kiya
Sach kahun to main yahi chahta hun
Main kisi bhi qimat par khud ko badalna nahi chahta
Main khud ko fana to karna chahta hun
Magar tere liye kuch kar bhi jaana chahta hun
Main khaak hone ko taiyaar hun har waqt
Bas mujhe sirf ek aise waqt ki talash hai
Jis pal me main tere liye kuch kar sakun
Humara sath bahut khubsurat raha
Jitna bhi raha bahut hi behtarin or bemishal raha
Tum soch bhi nahi sakti ke kitne betaab rahte the hum
Tere intezaar me har waqt rahte the hum
Subah mujhse dekhte hi teri good morning wish
Mere dil ko behisaab khushiyon ke liye kafi thi
Khair khaak dalo in sab par meri dua hai
Tum jaha raho khush raho aabaad raho bas itna hi


Note : Ek khubsurat khwaab jiski kabhi tabeer nahi ho sakti

Md Danish Ansari

Tuesday, 24 April 2018

मुझे भी तमन्ना होती है तेरी

April 24, 2018 0 Comments


मुझे भी तमन्ना होती है तेरी 
तुझे भी क्या मुझसी तड़प उठती है
ख्यालों ख्यालों में रहता हूँ हर वक़्त 
तुझे भी क्या मुझसी तलब होती है
कहना मैं चाहूँ पर कुछ भी न कह पाऊँ
तुम्ही बता दो मैं कैसे जताऊँ
है इस दिल में प्यार जो तेरे लिए है
कैसे मैं उसको तुझसे मिलाऊँ
मुझे भी तमन्ना होती है तेरी
तुझे भी क्या मुझसी तड़प उठती है
गुजर जाती है दिन तुझको याद करके
रातें गुजरती है तेरी फरियाद करके
तीनों पहर में ख्याल है मुझको
तू मेरी नही किसी और कि है 
लड़ लड़ मैं जाता सबसे यहाँ पे
जो तुम ये कहती इश्क़ है तुमसे
मगर कोई अफ़सोस नही है मुझको
जो भी हुआ है तेरे हक़ में हुआ है 
सिर्फ इश्क़ ही यहाँ जरूरी नही है
क़ाबील बनाना पड़ता है खुद को
इश्क़ का रंग मुझपे भी चढ़ा है
उसकी खूबसूरत यादों का 
मुझ पर पहरा है 
वो रगो में दौड़ती है लहू बनके मेरी 
उसकी एक एक मुस्कान का 
मेरी आँखों में बसेरा है
इश्क़ में हम तो हम ही नही है
कहता है ज़माना के बस तू ही तू है
मैं मैं भी अब रहा नही साक़ी
अब तू ही बता मुझमे मेरा क्या है बाकि

मुझे भी तमन्ना होती है तेरी

तुझे भी क्या मुझसी तड़प उठती है

*****
Md Danish Ansari

Wednesday, 11 April 2018

तुम कौन पिया..... second & Last part

April 11, 2018 0 Comments

कल तक था जो अपना वो पराया हो गया
किस मोड़ पे आ के हमसे वो बिछड़ गया

तुम कौन पिया तुम कौन पिया 
शाम ढलती नहीं मुझमे अब भी

हर रात जग के कटती रही यूँही
अश्क बह जाते है मेरी आँखों से 

सुबह होते तक तकिये गीली रही 
क्या रिश्ता है  तुम्हारा और मेरा 

बताओं न, तुम कौन पिया तुम हो कौन पिया 
क्यों तुम मुझे अपने से लगते हो 

फिर क्यों मैं तुमसे डरा करती हूँ 

कोई  नुकसान  न  किया  तुमने 
फिर भी तुझसे दूर रहा करती हूँ 

जो मेरा अपना है वो मुझे पराया लगता है 
और तुम  पराये हो फिर  भी अपना  सा है 

तुम  हो   कौन  पिया   तुम  कौन  पिया 
अजीब दास्तान  है मेरी और तुम्हारी भी 

बहुत गमगीन हूँ हँसती रहती हूँ फिर भी 
जो हमसफ़र है मेरा उसे अश्क दिखते नही

एक  तुम  हो  जो  दबे  पाओं  चले  आते हो 
क्या रिश्ता है अब तुम्हारा हमारा 

बताओं न, तुम हो कौन पिया तुम कौन पिया 
तुम कौन पिया तुम कौन पिया 

*****
Md Danish Ansari

Saturday, 7 April 2018

Tumhari Aawaz.....

April 07, 2018 0 Comments

Tumhari aawaz pe hum sab kuch 

haar gaye

Dil  haar  gaye or apni  jaan bhi 

 haar  gaye

In  aankhon  ki   neend  bhi   haar 

 gaye  or

Raaton  ka  apna  chain  bhi hum
haar gaye


Tumhari aawaz pe hum sab kuch haar gaye

Kuch  bhi  to  baaki   nahi  hai  ab  mujhme

Suno ek baat kahta hun tum bura na manna

Tum jo ho so ho par ab mujhme bhi sirf ek tum hi tum ho

Ye  kaise hua kyo hua kuch bhi pata nahi mujhe

Bas  ek  aawaz  suni ke or sab  kuch  haar  gaye

Tumhari  aawaz  pe  hum  sab  kuch  haar  gaye

Ye na puchh lena mujhse ke mohabbat me kya doge

Mera to ab  mujhme kuch bhi nahi sab  tera ho gaya

Chand qatre hai lahoo udhar ke jo meri rago me daudte hai

Kuch mohlat mujhe tu  de to kuch mol de dun use

Fir tere naam bade  shauq  se wasiyat kar jayenge

Apne  lahoo  se  tera har  kahi  zikr  karte  jayenge

Tumhari   aawaz   pe  hum   sab  kuch   haar  gaye

Dil   haar   gaye  or  apni    jaan   bhi    haar   gaye

*****
Md Danish Ansari

Friday, 30 March 2018

कुछ टूट रहा कुछ बिखर गया

March 30, 2018 0 Comments

कुछ टूट रहा कुछ बिखर गया 
मुझमे जैसे कोई रेत सा फिसल गया 
सिर्फ बाहर को ही शाम होती नहीं यहाँ 
एक शाम उतर रही चुपके से मुझमें 
स्याह अँधेरा कुछ पल में ही हो जायेगा 
वो मुझे अपने गिरफ्त में ले जायेगा 
तू आ और रौशनी कर मेरे अंदर 
मुझे रास्ता दिखा मुझी को मेरे अंदर 
डूब जाये न कही मेरी ज़िन्दगी का सूरज 
तू आ और मेरी कुछ तरबियत कर 
मैं वक़्त का मारा हुआ हूँ मेरे खुदा 
तू अपनी कलम से मेरी हिफाजत कर
मैंने कागज़ के नाओं पे तेरे नाम के सहारे 
सफर पर निकल चूका हूँ तेरे ही सहारे 
डूबता हूँ तो डूब जाऊँ परवाह नहीं मुझको 
तू मुझे कभी याद करे इस दरिया के किनारे 
कोई पूछे की ये दरिया कौन सी है 
तो कहना एक पागल बन्दे की है 
जिसने कागज के नाओं पे मेरा नाम लिखा 
लहरों से जा टकराया एक मेरे नाम के सहारे
*****

Md Danish Ansari

Tuesday, 20 March 2018

Tum Kaun Piya | First Part

March 20, 2018 0 Comments

Meri yaadon me Tum mere khwabo me Tum
jara bata do itna Mujhe ke Tum kaun piya

Jab bhi udas hoti hun tum aa jate ho 
Bina koi dastak ke Tum ho kaun piya

Main to tumhe janti bhi nahi pahchanti bhi nahi
Fir bhi kyun apne se lagte ho ye bata do piya

Kahte ho ke Main apna gum tumhe de dun
Is Qadar ye meharbani mujh par kyo hai piya

Jab bhi udas hoti hun tum mere kareeb hote ho
Ankhon me ask mere hote magar rote tum kyo piya

Sajti hun sanwarti hun khilkhilati hun hansti hun
Tum dur se hi muskurate ho Tum ho kaun piya

Kitne baar kaha hai tumse ke na aaya karo
Magar Tum ho ke haq apna ada kerne aa jate piya

Meri yaadon me Tum mere khwabo me Tum
Jara bata do itna Mujhe ke Tum kaun piya

*****
Md Danish Ansari

Friday, 16 March 2018

Tu Sath Sath Hai Mere.....

March 16, 2018 0 Comments

Tu sath sath hai mere
Main sath sath hun tere

Dil jor jor se dhadke 
Jo hanth mera Tum thaame

Khil rahi hai har kali kali
Aaj baagon men muskura ke

Jo ek nazar tu dekh le
Main khil khila si jaun 

Jo chhu lo tum mujhe
Main sharm se dhal jaun 

Tu sath sath hai mere
Main sath sath hun tere

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Md Danish Ansari

Ye Sham Dhal Rahi Hai.....

March 16, 2018 0 Comments

Ye sham dhal rahi hai koi dur ho raha hai
Tum dur na ho mujhse ye dil kah raha hai 

Kahti hai meri aankhen jara sun lo mere sathi
Tujhe dekh lun jara fursat se ye dil kah raha hai 

Ye suraj jo Zarb hota ye kaha kaha ko jaata 
Ye sawal kyo kare Tum iska jawab nahi bhaata

Thahar thahar ke bite ye jo pal fisal raha hai
Hum wada kar rahe hai kal fir hum milenge

Ye sham dhal rahi hai koi dur ho raha hai
Tum dur na ho mujhse ye dil kah raha hai

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Md Danish Ansari

Tere Kareeb.....

March 16, 2018 0 Comments

Tere kareeb rahna chahun main
Tujhse alag nahi Tujhme rahna chahun main

Duriya ho tere mere bich magar itni bhi nahi
Tujhe har waqt har pal khud me mahsus karna chahun main

Khushboo ki tarah Mahak jaye tu
Or phoolon ki tarah bichh jaun main

Tere kareeb rahna chahun main
Tujhse alag nahi Tujhme rahna chahun main

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Md Danish Ansari