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| Mera Aqsh |
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है
एक मोटी परत है धूल की मगर देखो
उसमे भी तेरे नाम के हर्फ़ बाकि है
कभी उभरता है तो साफ़ दीखता है
कभी छुपने की नाकाम कोशिश करता है
कभी मेरे पीछे बेसुध दौड़ पड़ता है
तो कभी छुप छुपा कर पीछा करता है
अजीब दास्ताँ है मेरी और तेरी यादों का
कभी खिलती धुप की तरह है, तो
कही टिमटिमाती लौ की तरह है
सच कहता हूँ। .......
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है
कभी तड़पता हूँ तो कभी खुश होता हूँ
कभी रूठता हूँ कभी खुदी को मनाता हूँ
शहर-ए-यार में इन आँखों ने हुश्न का दीदार बहुत किया है
मगर इस दिल ने एक तेरे सिवा किसी से न वफ़ा किया है
किसी भूली बिसरी कहानी की तरह है
फिर भी यहाँ तेरी यादों के निशाँ बाकि है
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है।
*****
Md Danish Ansari

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