Thursday, 11 October 2018

बहुसंखयक समाज अल्पसंखयक समाज से क्यों डरता है

October 11, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh
गोंडवाना लैंड के विभाजन से पहले सभी देश एक ही महाद्वीप का हिस्सा थे जिसे गोंडवाना लैंड कहा जाता है ! धरती के भाहरी परत में टूट और उसके बिखराओ ने बहुत सारी सीमाओं का सीमांकन किया एक तरफ जहा उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका का निर्माण हुआ वही दूसरी तरफ यूरोप महाद्वीप का निर्माण हुआ वही अफ्रीका का और कुछ इसी तरह एशिया महाद्वीप का निर्माण हुआ ! भारत जोकि कभी अफ्रीका से लगा हुआ था वह टूट कर हिन्द महासागर से होता हुआ चीन से जा कर टकराया पृथ्वी के बाहरी परतो का आपस में यूँ मिलना और उनका एक दूसरे के अंदर सरकना इसकी वजह से हिमालय का निर्माण हुआ ! आपको जान कर यह हैरानी होगी की यह खिसकाओ आज भी जारी है और हर साल माउन्ट एवेरेस्ट की उचाई करीब आधा सेंटीमीटर बढ़ जाती है ! 

इसके बाद दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग महान सभ्यताओं का विकास हुआ जिसमे सबसे पुरानी सभ्यता थी मेसोपोटामिया उसके बाद मिश्र की सभ्यता फिर भारत की हड़प्पा और मोहन जोदरो की सभ्यता फिर चीन की सभ्यता और फिर अमेरिका की माया सभ्यता और इन सभ्यताओं में सबसे पहले जिन दो सभ्यताओं का मिलन हुआ वो थी मेसोपोटामिया और मिश्र की सभ्यता यह इस लिए भी संभव हुआ क्योकि दोनों सभ्यताओं की सरहद लगभग सटी हुई थी ! कई विद्वानों का तो यह भी कहना है की मेसोपोटामिया सभ्यता ही मिश्र की सभ्यता है पर इसमें बहुत विवाद है ! उसके बाद मिश्र से अरब का विकास हुआ और अरबो का आना जाना भारत में हुआ जिससे अब दुनिया की तीन सबसे बड़ी सभ्यताएं एक दूसरे के सम्पर्क में आ चुकी थी अरब भारत से ववपार करते थे ! जबकि दुनिया की दो और सभ्यताएँ हम उनसे और वो हमसे बिलकुल अछूते थे क्योकि एक तरफ हिमालय था तो दूसरी तरफ विशाल समुद्र शायद यही वजह रही की इन सभ्यताओं का आपस में मिलान नहीं हुआ बहुत लम्बे वक़्त के लिए !

दुनिया बदलती गयी उसके साथ ही सभ्यताएँ विकास करने लगी वहाँ भी जीवन पनपा जहा जीवन की कोई सम्भावना ही नहीं होनी थी ! समय और अंतरिक्ष ने मानव जाति को विकास करने और आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया और उसका हमने भरपूर उपयोग भी किया और इसी के साथ दुनिया भर के अलग अलग हिस्सों में राज व्यवस्था का उदय हुआ सब एक से बढ़ कर एक थी और सभी ने अपना शक्ति विस्तार किया दुनिया में शायद ही कोई ऐसी रजवावस्था होगी जिसने अपने शरहद और शक्ति का विस्तार न किया हो और इसी शक्ति और सिमा विस्तार में कई अलग अलग संस्कृति आपस में टकराई ! भौतिक विज्ञानं में हमे पढ़ाया जाता है की जब दो पार्टिकल्स आपस में टकराते है तो पहले विनाश होता है फिर उसी विनाश से निर्माण का काम शुरू होता है ! यही नियम दुनिया भर की सभ्यताओं का आपस में टकराना और उनका विध्वंश होना और उनके विध्वंश से फिर नयी संस्कृति और राजवावस्था का जन्म होना इसका प्रमाण है !

खैर वक़्त के साथ सब कुछ बदलता है हमारी पूरी दुनिया बदल गयी फिर आया हमारा युग जिसे हम आधुनिक युग कहते है ! इसी आधुनिक युग की शुरुआत में राष्ट्रवाद की शुरुआत हुई वैसे इस आधुनिक युग से पहले राष्ट्र की अवधारणा तो थी मगर वह उतनी मजबूत नहीं थी जब तक राष्ट्रवाद की अवधारणा सामने न आयी फिर उसके बाद दुनिया भर में राष्ट्रवाद के नाम पर बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यक समाज के साथ राष्ट्रवाद के नाम पर सिर्फ और सिर्फ बर्बरता ही दिखाई है ! यह बात मैं किसी एक देश के लिए नहीं कह रहा यह दुनिया भर के मुल्को पर फिट बैठता है फिर चाहे वो यूरोप में यहुदिओं का कत्लेआम हो या फिर अमेरिका में गोरे लोगो के द्वारा काले लोगो का शोषण ! आप दुनिया के हर एक मुल्क का इतिहास और उसका आज देख लीजिये कल भी बहुसंख्यक समाज एक झूठे डर का सहारा लेकर अल्पसंख्यक समाज को कुचलता रहा है और आज भी वही हो रहा है ! यह अल्पसंख्यक समाज सिर्फ धर्म के आधार पर नहीं है बल्कि कही रंग के आधार पर है तो कही नस्ल के आधार पर कही संस्कृति के आधार पर तो कही भाषा के आधार पर मेरे कहने का तात्पर्य यह है की बहुसंखयक समाज हमेशा अल्पसंखयक समाज का शोषण करता रहा है किसी एक वक़्त या जगह पर यह अपवाद हो सकता है !

मगर ज्यादातर यही देखा और पाया गया है एक ही जैसी सोच मान्यता संस्कृति सभ्यता और भाषा बोलने और उन्हें फॉलो करने वाले लोग हमेशा से अपने से अलग लोगो से डरते रहे है ! उनका ये डर जोकि बेबुनियाद है अक्सर आक्रामक हो जाता है फिर शुरू होता है कत्लेआम का वो दौर जिसमे इंसानी ज़िन्दगी का कोई महत्व नहीं रह जाता ! अब सवाल यह है की बहुसंख्यक समाज भला अल्पसंखयक समाज के लोगो से डरता क्यों है ? इसकी वजह साफ़ है हम इंसानो ने अपने अंदर ही एक तरह का सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है जिसे हम दिमाग की प्रोगरामिंग करना कह सकते है ! हम अपने दिमाग को इसी बात में यकीं दिलाते रहते है की जो हमारे जैसा दीखता है उनसे हमे कोई खतरा नहीं यहाँ दिखने का मतलब हर तरह के स्तर पर है जैसे धर्म जाती संस्कृति नाम रहन सहन पहनावा खाना पीना इत्यादि ! जहा उनके बिच कोई ऐसा व्यक्ति आ जाता है जिसका नाम अलग है पहनावा अलग है बोलने खाने पिने रहन सहन सब कुछ भिन्न है, वैसे ही बहुसंख्यक समाज सुरक्षा की मुद्रा में आ जाता है जबकि यह बात सच है की उसे किसी तरह का खतरा नहीं है ! इसके बावजूद वह हर कीमत पर सामने वाले को कुचल देना चाहता है वही अगर उन्ही के जैसा कोई व्यक्ति भले ही उन्हें ज़िन्दगी भर छलता रहे उनका शोषण करता रहे फिर भी वह उसमे विश्वास दिखाते है और यह कहने में कुछ गलत नहीं की यह आधुनिक समाज में लोगो की सबसे निचले स्तर की मूर्खता मात्र है !

नोट : आप मेरे विचारो से असहमत हो सकते है !

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Md Danish Ansari

Saturday, 6 October 2018

आज़ाद हूँ

October 06, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh
आज़ाद हूँ परवाज हूँ हर बात की मैं काट हूँ 
रोके ज़माना मेरे कदम क़तरा क़तरा कहे मैं आज़ाद हूँ 
आज़ाद हूँ परवाज हूँ हर बात की मैं काट हूँ 
आँधियाँ क्या मोड़े मुझे मैं खुद ही तूफान हूँ 
आज़ाद हूँ। ......... आज़ाद हूँ। ......... आज़ाद हूँ 
कितने दिनों से मेरे पर क़तरता रहा है ज़माना यहाँ 
खामोश मैं सहमी हुई डरपोक मैं डरी हुई 
अब कहा वो डर है अब कहा वो दहशत दिल में है 
आज़ाद हूँ। ......... आज़ाद हूँ। ......... आज़ाद हूँ 
नोचते रहे हो तुम गोश्त मेरे सीने से 
अब ये बताओ मुझे क्या मिला है तुम्हे 
प्यास तेरी बुझती नहीं आग तेरी ठण्डी पड़ती नहीं 
फिर तो बेकार मेरा यूँ खामोश मर जाना मेरा 
आज़ाद हूँ परवाज हूँ हर बात की मैं काट हूँ 
आज़ाद हूँ परवाज हूँ हर बात की मैं काट हूँ 
आज़ाद हूँ। ....... आज़ाद हूँ। ......... आज़ाद हूँ 
आज़ाद हूँ !


Md Danish Ansari

Wednesday, 29 August 2018

नन्ही चिड़िया - Inspiration Story | Conclusion

August 29, 2018 0 Comments
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मैं थोड़ा उदास हो गया उसे वह न देख कर तभी अचानक से वो ची ची की आवाज करते हुए उसी पेड़ पर लोट आयी उसकी चोंच में कई तिनके थे ! शायद वह फिर से अपना घोसला बनाने वाली थी और देखते ही देखते उसने दिन भर तिनके इकठ्ठे करके अपना घोसला बनाना शुरू कर दी पर इस बार उसने अपना घोसला दूसरी डाल पे बनाई क्योकि पहली डाल तो टूट चूका था ! वो दिन भर काम करती रही मैंने घर वालो से कह कर उसके लिए अपनी खिड़की पर दाने रखवा दिए ताकि उसे कही दूर न जाना पड़े अपने खाने की तलाश में वो काम करती रही और मैं उसे देखता रहा ! वो बड़ी बारीकी से अपना काम कर रही थी एक एक तिनके को ऐसे एक दूसरे के साथ मिला रही थी जैसे एक चादर बुनने वाला धागों के क्रम को बड़ी सटीकता से करता है ठीक वैसे ही जैसे कपड़ो पे कढ़ाई की जाती है ! इससे पहले मैंने कभी इस पर धयान नहीं दिया कुछ देर बाद मेरी आँख कैसे लगी मुझे पता ही नहीं चला सुबह मुझे ची ची की आवाज़ सुनाई दी मैं जाग गया देखा वो चिड़िया मेरी खिड़की पे बैठी है !

मैंने उसके घोसले की तरफ देखा तो वह बन कर तैयार हो चूका था वो पहले वाले से बड़ा और ज्यादा मजबूत लग रहा था ! मैंने उस नन्ही चिड़िया से कहा - ओ तो तुम मुझे अपना घर दिखाना चाहती हो काफी खूबसूरत है तुम्हारा घर तुमने बहुत मेहनत की है इसके लिए है न ! वो बस खिड़की पे बैठी रही और ची ची की आवाज़ करती रही ऐसे जैसे वो मेरी बातो का जवाब दे रही हो शायद मेरा दिमाग ख़राब हो चूका है जो एक चिड़िया से बाते कर रहा हूँ और उससे उम्मीद कर रहा हूँ की वह मेरी बात को समझे और उसका जवाब दे ! तुम कितनी खुश किस्मत वाली हो तुम जहा चाहो वहा जा सकती मगर मैं नहीं हा कभी मैं भी दुनिया देखना चाहता था पर काम से फुर्सत ही नहीं थी आज फुर्सत है तो कही जाने के लायक ही नहीं ! खैर तुम्हे भूक लगी होगी तुमने कुछ खाया की नहीं, तभी दरवाजे पे दस्तक हुई अम्मी अंदर आयी तुम किस्से बाते कर रहे हो बीटा ? कुछ नहीं बस उस चिड़िया से देखिये उसने कितना खूबसूरत घोसला बनाया है अपने लिए, इसका पहला वाला घोसला बारिश और हवा के चलते बिखर गया था और वो डाल भी टूट गयी !

कुछ देर अम्मी मुझसे बाते करती रही फिर वो निचे चली गयी काम करने मेरी इस हालत को देख कर अम्मी उदास हो जाती है पर इसमें न तो मैं कुछ कर सकता था और न ही वो ! बारिश होने वाली है मैं उस नहीं चिड़िया के लिए थोड़ा परेशां भी हूँ पिछली बार उसका घोसला बिखर गया था इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए ये सोच कर बस उसके लिए दुआ कर दी ! उसका घोसला सही सलामत था मुझे यह देख कर काफी खुसी हुई कुछ दिन बीते और फिर एक रोज जब मैं सुबह उठा और खिड़की के बाहर जैसे ही देखा तो वह घोसला वहा नहीं था मैं थोड़ा परेशान हुआ मैंने जोर से अम्मी को आवाज लगाया और वो ऊपर, क्या हुआ तुम्हे ? अम्मी खिड़की से बाहर झाँक कर देखिये क्या उसका घोसला फिर से बिखर गया है ? तुम क्या कह रहे हो मैं कुछ समझी नहीं ? उस चिड़िया का घोसला देखिये की वो क्या बिखर गया है या निचे गिर गया है ! अम्मी निचे बाहर देख कर बोली माफ़ करना बेटा उसका घोसला टूट चूका है , मैं उदास हो गया !

कई दिनों तक वह मुझे दिखी नहीं मैं और परेशान होने लगा मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मेरा अपना मेरा साथ छोड़ गया हो मैं उसके बारे में बहुत ज्यादा सोच रहा था ! तभी एक शाम वो वापस आयी मेरी खिड़की पे उसके मुँह में फिर से कुछ तिनके थे ! मैं हैरान था - क्या तुम फिर से अपना घोसला बनाने वाली हो और वो भी उसी जगह देखो अगर तुम चाहो तो तुम यहाँ मेरे कमरे में रह सकती हो ! उसने अपने चोंच में दबे तिनके को खिड़की पे राखी और कुछ बोला उसने ची ची ची मैं समझ नहीं पाया की वो क्या कहना चाह रही है और वह फिर से उड़ कर उसी पेड़ पर जा बैठी और फिर शुरू हुई उसकी कारीगरी वह दिन रात मेहनत करती रही और देखते ही देखते फिर से घोसला तैयार हो गया ! मैं उसे देख कर हैरान था एक नन्ही सी जान जिसकी ज़िन्दगी शायद कुछ ही सालो की होगी वह इतना संघर्ष कर रही है सिर्फ अपने घर के लिए यह सब देख कर मैं हैरान था !

यह सब देख कर मुझे एक सिख मिली ज़िन्दगी चाहे छोटी हो या बड़ी उसे खुल कर जीना चाहिए और उस ज़िन्दगी में चाहे जितनी भी मुश्किलें आये उसका डट कर सामना करो आप हारोगे गिरोगे बार बार फ़िसलोगे मगर आपको रुकना नहीं है आपको बस वही करते जाना है ! जो आप करना चाहते है दुनिया क्या कहती है क्या करती है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता फर्क सिर्फ इस बात से आपको पड़ता है की आप क्या करना चाहते क्या पाना चाहते किससे प्यार करना चाहते है ये ज़िन्दगी आपकी है इसलिए आप यह तय करेंगे की आप अपनी ज़िन्दगी कैसे जीना चाहते है क्या आप बहादुरी के साथ ज़िन्दगी में आयी बड़ी से बड़ी तूफ़ान से सीधे टकरा जाना चाहते है या फिर उससे बचने के लिए भागना चाहते है आप बुजदिल बन कर जीना चाहते है या एक योद्धा की तरह वीर की तरह मरना चाहते है ! मैं इस बेड पर अपनी सारी ज़िन्दगी नहीं गुजारने वाला मैं बाहर जाऊंगा घूमूँगा जो मन में आएगा करूँगा प्यार करूँगा एक अच्छी ज़िन्दगी के लिए जो करना पड़े मैं करूँगा मैं हार नहीं मानुगा मैं हार नहीं मानुगा मैं हार नहीं मानुगा !

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Md Danish Ansari

Monday, 27 August 2018

नन्ही चिड़िया - Inspiration Story | Begining

August 27, 2018 0 Comments
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घर के पास एक बिहि के पेड़ पर एक नन्ही सी चिड़िया का घोसला था ! वो अक्सर सुबह पहले उठती और देर शाम को वापस अपने बसेरे पर आ जाती इस घोसले को बनाये अभी उसे कुछ ही महीने हुए थे ! उसका घोसला मेरे बेड के पास से ही लेटे हुए अपने बाजु वाली खिड़की से देख सकता था ! छुट्टी वाले दिन कभी कभार मेरी नज़र उसके घोसले पर पड़ती तो वो कभी खाली होता तो कभी वो नन्ही सी चिड़िया उसमे उछल कूद कर रही होती तो कभी उसमे कुछ और तिनके बुन रही होती ! यह सब जब मैं देखता तो अजीब सा एहसास होता ऐसा सुकून महसूस होता जैसे कोई धीरे धीरे आपको ख़ुशी दे रहा हो और आपको उसमे मज़ा आ रहा है लेकिन आप उसे बता नहीं सकते और न ही किसी को समझा सकते है !

इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में जब थक हार कर अपने कमरे में वापस लौटता तो अपने बेड पे जाते ही नज़रे कभी कभी उसे ढूंढ़ने लगती ! गर्मी का मौसम आ गया जबरदस्त गर्मी पड़ रही थी ! एक दोस्त ने मुझे मैसेज किया  की गर्मी का वक़्त है थोड़ा सा अनाज और पानी परिंदो के लिए छत पर रखा करो क्योकि वो प्यासे और भूके मर जाते है ! मैंने हलके से झुक कर खिड़की के बाहर देखा तो वो चिड़िया वही थी ! उसकी चहचहाट बहुत खूबसूरत थी कभी कभी तो वो मेरे खिड़की के पास आ बैठती तो मैं उसे बस देखते रहता की आखिर ये करना क्या चाहती है ! वो इधर से उधर फुदकते रहती मुझे अच्छा लगता था मैंने उसके लिए अपनी खिड़की के पास अनाज और पानी रख छोड़ा था ! वो अक्सर आती दाना चुगति और हलकी सी आवाज़ पर भी फुर से उड़ जाती !

दिन यूँही गुजरते गए और बारिश का मौसम आ गया मुझे बारिश बहुत पसंद है और भीगना भी मैं जानता हूँ ज्यादातर लोगो को बारिश का मौसम पसंद नहीं पर मुझे पसंद है ! एक दिन मैं अपने दोस्त के घर से लौट रहा था रात काफी हो चुकी थी और जोरो की बारिश हो रही थी ! मैं फिर भी बाइक धीरे धीरे चलाता रहा ! भीग भी रहा था अचानक से हवा तेज़ हो गयी तो ढंड लगने लगी हाँथ भी कापने लगे ! मैं धीरे धीरे बढ़ता रहा तभी अचानक से टायर स्लीप हुआ मैंने गाड़ी को संभालना चाहा मगर गलती से एस्क्लेटर दे दिया और मेरी बाइक सीधे साइड में लगे लोहे डिवीडर से टकराया और मैं फैका गया ! मुझे पैरो में काफी चोट लगी थी खून बह रहा था पर मैं उठ नहीं पाया बहुत कोशिश करने के बाद भी नहीं फिर बेहोश हो गया ! सुबह आँख हॉस्पिटल में खुली फिर मेरे दोस्तों ने मुझे घर पहुँचाया डॉक्टरों का कहना था की रात भर मेरा खून बहता रहा जिससे मेरे शरीर में खून की कमी हो गयी साथ ही पैर की कुछ खास नशों को ज्यादा चोट लगी जिससे खून बहुत बहा और वह सिकुड़ कर एक दूसरे से चिपक सी गयी यही वजह थी की मुझे अपने सीधे पैर में जान महसूस नहीं हुई !
डॉक्टर तो यहाँ तक बोल गए की शायद ये पैर अब कभी काम न करे मैं इस बात को लेकर काफी परेशान रहता ! फिर एक दिन बिस्तर पर लेटे लेटे अचानक से मुझे उस नन्ही चिड़िया का ख्याल आया तो मैंने खिड़की से बाहर देखा तो उसका घोसला वहा नहीं था वो डाल शायद उसी तूफ़ान में टूट गया था जिस दिन मेरा एक्सीडेंट हुआ था !

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Wednesday, 8 August 2018

फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है

August 08, 2018 0 Comments
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तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है 
एक मोटी परत है धूल की मगर देखो 
उसमे भी तेरे नाम के हर्फ़ बाकि है 
कभी उभरता है तो साफ़ दीखता है 
कभी छुपने की नाकाम कोशिश करता है
कभी मेरे पीछे बेसुध दौड़ पड़ता है 
तो कभी छुप छुपा कर पीछा करता है 
अजीब दास्ताँ है मेरी और तेरी यादों का 
कभी खिलती धुप की तरह है, तो 
कही टिमटिमाती लौ की तरह है 
सच कहता हूँ। ....... 
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है 
कभी तड़पता हूँ तो कभी खुश होता हूँ 
कभी रूठता हूँ कभी खुदी को मनाता हूँ 
शहर-ए-यार में इन आँखों ने हुश्न का दीदार बहुत किया है 
मगर इस दिल ने एक तेरे सिवा किसी से न वफ़ा किया है 
किसी भूली बिसरी कहानी की तरह है 
फिर भी यहाँ तेरी यादों के निशाँ बाकि है
तेरी यादों पे जमती रही है धूल मगर 
फिर भी तेरी यादों के निशाँ बाकि है। 

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Md Danish Ansari

Saturday, 7 July 2018

उस पेड़ की छाँव

July 07, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh
घर के बाहर थोड़ी दूर पे एक विशाल बड़ (बरगद) का पेड़ है वो इतना विशाल है कि उसकी शाखाओं के नीचे आस पास के कई घर आते थे अक्सर बारिश के मौसम में लोगो को अपने घरों की छत को साफ करना पड़ता था क्योंकि उसकी पत्तियाँ छत पे पानी को बहने नही देती थी। गर्मी के मौसम में सब उसके नीचे जा कर आराम करते लाइट गोल होती तो उसके चबूतरे पर लोग लेटे रहते उसकी शाखाओं पर मधुमखियों के कई छत्ते थे जो शहद से भरे रहते हर सुबह और शाम को अलग अलग तरह की चिड़ियों की आवाज़ होती वो उसी पर रहते फिर एक दिन जोर की हवा चली और उसकी एक डाल टूट कर नीचे गिर गई कोई जख़्मी नही हुआ और न ही किसी का घर टुटा मगर लोगो के दिलों का डर उस पेड़ के लिए मुसीबत हो गई पहले उसकी एक शाख को काटा गया लोग उसे लेकर अब बुरा भला ही बोलते की ये पेड़ यहाँ नही होना चाहिये वगेरा वगैरा और देखते ही देखते वह बड़ का पेड़ सूखने लगा उसकी शाखाएँ सुख गयी लोगो ने उसे कटवाना शुरू किया और देखते ही देखते उस पेड़ का सिर्फ अब तना ही रह गया। अब न तो मधुमखियों के छत्ते है और न ही सुबह शाम को चिड़ियों की आवाज़ बस एक खामोशी है वो पेड़ अब बढ़ नही रहा उसकी तने पे कुछ पत्तियाँ फूटती तो है फिर सुख कर झड़ जाती है। शायद वह अब डर गया है उसने इंसान की कुल्हाड़ी की धार जितनी महसूस न कि होगी उससे ज्यादा उनकी जली कटी बाते महसूस की होगी। इस साल गर्मी में जब सूरज ने आग बरसाया तो सबको उस पेड़ की छाँव याद आ ही गई।
यह सब देख कर मुझे अपने अंदर का वो हिस्सा नज़र आया जो हम इंसान अक्सर सभ्य दिखने के लिए छुपाने की कोशिश करते है। वह पेड़ न जाने कितने सालों से वहाँ था न जाने उसने कितनी बारिशें देखी होंगी वह पेड़ उस जगह पर तब से था जब वहा इंसान की बस्ती तो क्या कोई इंसान भी नही था। अब सब कहते है अरे ये पेड़ था तो कितना सुकून था अब सभी को उस पेड़ की छाँव याद आती है।
नोट: यह लघु कथा सच्ची घटना पर आधारित है।

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Md Danish Ansari

Thursday, 5 July 2018

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी

July 05, 2018 0 Comments
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Mera Aqsh
कई बार सोचा है मैंने इस बारे में

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी 
क्या पुरानी बातें फिर से उखड़ने लगेगी
या नए रिस्तों के साथ नई बातें होगी
अक्सर सोचता हूँ 
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी 
क्या पुरानी शिकवे और शिकायते होगी
या नई चाहतो और मंज़िलों की बाते होगी
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी 
क्या मस्जिदों की अज़ाने और मंदिरों की 
आरती भी साथ होगी
या फिर सहरा के सन्नाटो में बात होगी
मैं अक्सर सोचता हूँ इस बारे में
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी 
तो क्या बात होगी
क्या तुम पहले की ही तरह मुझसे मिलोगी
या फिर जमाने की बंधनो में जकड़ी हुई 
सुगबुगाहटों भरी बातें होगी
कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी
तेरी आँखों में कशिश क्या अब भी वही है
क्या उनमे अब भी ऊँची लहरें उठती है
क्या उसमे अब भी वही कशिश है
जो जमाने को ठहरने पे मजबूर कर दे
क्या तेरे किरदार में अब भी वो भोलापन है
जो पत्थर को पिघलने पर मजबूर कर दे


कई बार सोचा है मैंने इस बारे में

कभी मेरी तुम से मुलाकात होगी
तो क्या बात होगी 

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Md Danish Ansari